Patna : पटना हाईकोर्ट ने बिहार में प्रॉपर्टी टैक्स वसूली के फॉर्मूले को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और पटना नगर निगम को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का मोहलत दिया है. चीफ जस्टिस वी कामेश्वर राव व जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने विनय कुमार व अन्य की रिट याचिका पर सुनवाई की. इस मामले पर अगली सुनवाई 23 नवंबर, 2026 को होगी.

राज्य सरकार द्वारा बड़े कॉमर्शियल प्रतिष्ठानों पर मनमाना टैक्स लगाने और आम आवासीय घरों पर भारी भरकम टैक्स थोपने के आरोप वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने विस्तृत सुनवाई करने के बाद राज्य सरकार और पटना नगर निगम से जवाब मांगा है.

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनु कुमार ने पक्ष प्रस्तुत करते हुए कोर्ट को बताया कि याचिका में बिहार नगरपालिका संपत्ति कर निर्धारण, संग्रह और वसूली नियमावली, 2013 के नियम 4 को चुनौती दी गई है.

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा18जुलाई,2013को जारी गजट अधिसूचना और उसके बाद26सितंबर, 2023को जारी अधिसूचना तथा10सितंबर, 2025को जारी नवीनतम अधिसूचना पूरी तरह से मनमानी,दुर्भावनापूर्ण और गैर-कानूनी है.

यह नियम 4, बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 127(2), 127(7), 127(9), 127(13) और 127(3)(i)(ii) के प्रावधानों के विपरीत है और संविधान के अनुच्छेद 14 में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है.

याचिका के अनुसार, मौजूदा फॉर्मूले के तहत होटल जैसे बड़े व्यावसायिक उपयोग वाली संपत्तियों पर प्रॉपर्टी टैक्स में काफी बोझ पड रहा है, जबकि सामान्य रिहायशी मकानों पर भी कर का भारी बोझ लादा जा रहा है.

याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि जारी अधिसूचनाओं के आधार पर वसूली पर रोक लगाई जाए और यदि गलत तरीके से वसूली हुई है,तो7प्रतिशत ब्याज के साथ रिफंड का आदेश दिया जाए.

कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य सरकार और पटना नगर निगम को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दायर करने का समय दिया है,जबकि याचिकाकर्ता को उसके बाद दो सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है.

अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर ,2026 को होगी. राज्य की ओर से महाधिवक्ता एस.डी. संजय और पटना नगर निगम की ओर से वरीय अधिवक्ता प्रसून सिन्हा उपस्थित थे.

पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-