पटना: बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने खरीफ विपणन मौसम2026-27के लिए बिहार में निर्धारित धान खरीद के लक्ष्य को35लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर50लाख मीट्रिक टन करने की मांग की है. इस संबंध में उन्होंने भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र भेजकर आवश्यक स्वीकृति शीघ्र प्रदान करने का अनुरोध किया है.

मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि भारत सरकार ने पत्र के माध्यम से बिहार के लिए खरीफ विपणन मौसम2026-27हेतु धान खरीद का लक्ष्य35.00लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है. धान खरीद की अवधि01नवंबर2026से31मार्च2027तक निर्धारित है. पिछले वर्षों के आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिहार में धान का अनुमानित उत्पादन लगातार बढ़ा है, जबकि कुल अनुमानित उत्पादन के अनुपात में धान खरीद का लक्ष्य लगातार कम होता गया है. वर्ष2023-24में अनुमानित धान उत्पादन133.26लाख मीट्रिक टन था और खरीद लक्ष्य45लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया था. वर्ष2024-25में अनुमानित उत्पादन बढ़कर141.08लाख मीट्रिक टन हुआ, जबकि खरीद लक्ष्य45लाख मीट्रिक टन रहा. वर्ष2025-26में अनुमानित उत्पादन151.36लाख मीट्रिक टन पहुंच गया, लेकिन खरीद लक्ष्य घटकर36.85लाख मीट्रिक टन रह गया. वहीं, वर्ष2026-27में अनुमानित धान उत्पादन154.39लाख मीट्रिक टन है, जबकि खरीद लक्ष्य मात्र35लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है.

मंत्री ने कहा कि राज्य में धान खरीद की क्षमता में लगातार उल्लेखनीय सुधार हुआ है. वर्ष2023-24में निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध68.42प्रतिशत, वर्ष2024-25में87.18प्रतिशत तथा वर्ष2025-26में99.84प्रतिशत धान की खरीद की गई. इससे स्पष्ट है कि बिहार निर्धारित खरीद लक्ष्य को प्रभावी ढंग से पूरा करने में सक्षम है.

चौधरी ने कहा कि01सितंबर2026को खाद्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्यों के खरीद लक्ष्य निर्धारण को लेकर चर्चा हुई थी. वर्तमान व्यवस्था में पिछले तीन वर्षों की औसत खरीद उपलब्धि के आधार पर लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं. बिहार के संदर्भ में यह पद्धति राज्य में लगातार बढ़ रहे धान उत्पादन और किसानों की वास्तविक क्षमता के अनुरूप पर्याप्त खरीद लक्ष्य निर्धारित करने में बाधक है.

उन्होंने आग्रह किया कि बिहार के लिए धान खरीद का लक्ष्य पिछले तीन वर्षों की औसत खरीद उपलब्धि के आधार पर निर्धारित करने के बजाय राज्य के अनुमानित धान उत्पादन को आधार बनाकर निर्धारित किया जाए. इससे अधिक से अधिक किसानों को अपनी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा.

मंत्री ने बताया कि बिहार में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत जन वितरण प्रणाली के माध्यम से वितरण के लिए प्रतिवर्ष लगभग33.16लाख मीट्रिक टन चावल की आवश्यकता होती है, जो लगभग48.87लाख मीट्रिक टन धान के बराबर है. बिहार अब स्थानीय स्तर पर आवश्यक मात्रा में धान की खरीद करने में सक्षम है. राज्य की वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किए जाने से बिहार खाद्यान्न के मामले में अधिक आत्मनिर्भर बनेगा तथा अन्य राज्यों से चावल मंगाने में होने वाली अतिरिक्त परिवहन लागत को भी कम किया जा सकेगा.

चौधरी ने कहा कि वर्तमान35लाख मीट्रिक टन का धान खरीद लक्ष्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम तथा अन्य सरकारी योजनाओं के तहत राज्य की चावल आवश्यकता को देखते हुए पर्याप्त नहीं है. लक्ष्य कम रहने की स्थिति में राज्य के बड़ी संख्या में किसान भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी उपज बेचने के अवसर से वंचित हो सकते हैं.

उन्होंने भारत सरकार से आग्रह किया कि खरीफ विपणन मौसम2026-27 के लिए बिहार का धान खरीद लक्ष्य50 लाख मीट्रिक टन निर्धारित करने की आवश्यक स्वीकृति शीघ्र प्रदान की जाए, ताकि राज्य के अधिक से अधिक किसानों को उनकी धान की उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त हो सके और बिहार की खाद्यान्न आवश्यकताओं की पूर्ति स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित की जा सके.

पटना से अंकिता की रिपोर्ट-