पटना : बेटियों को शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना समाज के विकास के लिए जरूरी है. इसी दिशा में बिहार सरकार की विभिन्न योजनाएं बेटियों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ा रही है और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर दे रही है. मुख्यमंत्री साइकिल योजना, मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन योजना और सरकारी स्कूलों में प्रोजेक्ट आधारित लर्निंग जैसी पहल छात्राओं को पढ़ाई जारी रखने, अपनी प्रतिभा निखारने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. आइये मिलिए अंजलि और सोनालिका से, जिनकी जिंदगी में साइकिल योजना ने बदलाव लाने में मदद की है.

शिक्षा से सशक्तिकरण तक, बिहार की बेटियां लिख रहीं बदलाव की नई कहानी

बेटियों के सपनों को मिला योजनाओं का सहारा


बिहार की ढिवारा ग्राम पंचायत की रहने वाली सोनालिका बताती हैं कि,"पहले स्कूल दूर होने के कारण नियमित रूप से स्कूल जाना मुश्किल था. लेकिन अब हर पंचायत में प्लस टू स्कूल की सुविधा मिलने से यह परेशानी दूर हो गई है." सोनालिका अब घर के कामों तक सीमित रहने के बजाय स्कूल जा रही हैं और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है.


इसी ग्राम पंचायत की रहने वाली अंजलि और रिमझिम कुमारी को भी सरकारी योजनाओं से पढ़ाई में काफी मदद मिली है. अंजलि कुमारी बताती हैं कि,"राज्य सरकार की योजनाओं ने उच्च शिक्षा को आसान बना दिया. मुख्यमंत्री पोशाक योजना, साइकिल योजना और छात्रवृत्ति ने हमें पढ़ाई में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है. इसके लिए मैं मुख्यमंत्री जी की आभारी हूं."


वहीं रिमझिम कुमारी बताती हैं कि,"हर पंचायत में +2 और माध्यमिक स्कूल होने से पढ़ाई आसान हुई है और हमारी पढ़ाई में रुचि बढ़ी है. पहले स्कूल की दूरी की वजह से माता-पिता हमें पढ़ने नहीं भेजते थे, लेकिन अब स्कूल नजदीक होने के कारण हम आसानी से पढ़ पा रहे हैं और हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है."


यह कहानी सिर्फ सोनालिका, रिमझिम और अंजलि की नहीं है. बिहार में हजारों बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से कई योजनाएं और नवाचार किए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, मुख्यमंत्री साइकिल योजना, पीएचडी और रिसर्च फेलोशिप योजना (2026), बिहार बेटी स्टार्टअप चैलेंज योजना (2026), शिक्षा चौपाल और प्रतियोगी परीक्षा प्रोत्साहन जैसी पहल इसमें प्रमुख हैं.


साइकिल योजना से आसान हुई स्कूल तक की राह


पहले स्कूल की दूरी बेटियों की शिक्षा में बड़ी बाधा बनती थी. इसी परेशानी को दूर करने के उद्देश्य से बिहार में वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री साइकिल योजना की शुरुआत की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य स्कूल की दूरी के कारण किसी भी लड़की को पढ़ाई छोड़ने से रोकना और उसे आगे की शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना था. लड़कियों के लिए शुरू हुई इस योजना की काफी चर्चा हुई थी.


इस योजना से स्कूलों में छात्राओं की उपस्थिति में काफी सुधार हुआ. आज गांव-गांव में बेटियां बिना किसी भय या संकोच के साइकिल से स्कूल जाती दिखाई देती हैं. यह योजना छात्राओं के लिए स्कूल तक पहुंचना आसान बनाने के साथ-साथ उनकी शिक्षा जारी रखने में भी मददगार बनी है.


इन योजनाओं से छात्राओं की शिक्षा को नई दिशा मिल रही है. आज बिहार की बेटियां उच्च शिक्षा से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं. सरकारी योजनाएं उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने और अपने सपनों को पूरा करने की राह आसान बनाने में मदद कर रही हैं.