झारखंड की राजधानी रांची का ऐतिहासिक चुटिया श्रीराम मंदिर इन दिनों भक्ति के रंगों में पूरी तरह सराबोर है! शारदीय नवरात्रि के इस पवित्र अवसर पर यहाँ शुरू हो चुका है अलौकिक 'श्री रामायण नवाह्न परायण महायज्ञ' और सामूहिक रामायण पाठ। 17वीं शताब्दी यानी लगभग 1685-1686 में नागवंशी राजा रघुनाथ शाह द्वारा बनवाए गए इस प्राचीन मंदिर की भव्यता और यहाँ की परंपराएँ हर किसी का मन मोह लेती हैं।

इस महायज्ञ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ वर्ष 1970 से निरंतर यह परंपरा चली आ रही है। इस वर्ष अनुष्ठान में 151 कुंवारी कन्याएँ शामिल होकर पूरे नौ दिनों तक पवित्र रामायण का सामूहिक पाठ कर रही हैं। सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक गूंजने वाले इन पावन मंत्रों और चौपाइयों से पूरा मंदिर परिसर राममय हो जाता है। इसके पश्चात, संध्या के समय होने वाली भव्य महाआरती में हज़ारों श्रद्धालु शामिल होकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि हमारी नई पीढ़ी में सांस्कृतिक संस्कार और नारी शिक्षा को बढ़ावा देना है। बालिकाओं द्वारा रामायण का यह पाठ समाज में नारी शक्ति और ज्ञान का एक अनूठा संदेश दे रहा है।