पटना: बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव परिणाम 27 अक्टूबर को घोषित होंगे. इन नतीजों पर सिर्फ उम्मीदवारों की जीत-हार का फैसला नहीं होगा,बल्कि जेडीयू की अंदरूनी राजनीति और संगठनात्मक समीकरणों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो सकती है. मोकामा विधायक अनंत सिंह के निष्कासन के बाद पार्टी में अनुशासन,नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
अनंत सिंह प्रकरण ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
जेडीयू ने अनंत सिंह को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है. पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में उन्होंने जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ रुख अपनाते हुए जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार का समर्थन किया था. पार्टी नेतृत्व की ओर से विवाद सुलझाने की कोशिश की गई,लेकिन सहमति नहीं बन सकी. इसके बाद पार्टी ने कार्रवाई की. इस घटनाक्रम ने जेडीयू के भीतर संगठनात्मक अनुशासन और नेताओं के बीच समन्वय को लेकर बहस तेज कर दी है.
संजय झा और ललन सिंह की भूमिका पर नजर
जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं. अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी ललन सिंह को दी गई थी. हालांकि,विवाद का समाधान नहीं निकल सका. अब चुनाव परिणाम के बाद पार्टी नेतृत्व की रणनीति और वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल पर नजर रहेगी.
निशांत कुमार के लिए भी अहम समय
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक सक्रियता बढ़ने के बीच उनकी भूमिका पर भी चर्चा हो रही है. एमएलसी चुनाव के परिणाम को पार्टी के भविष्य के नेतृत्व से जोड़कर देखा जा रहा है,हालांकि केवल चुनाव नतीजों से उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता तय नहीं होगी.
आरजेडी ने जेडीयू में गुटबाजी का आरोप लगाया है,जबकि जेडीयू प्रवक्ता चंदन सिंह ने पार्टी में वर्चस्व की लड़ाई से इनकार किया है. अब 27 अक्टूबर के नतीजों के बाद जेडीयू की रणनीति और संगठनात्मक एकजुटता पर सबकी नजरें रहेंगी.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
