निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने, नाम हटाने एवं सुधार की प्रक्रिया तथा नागरिकों के मौलिक मताधिकार से जुड़े गंभीर सवालों को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा 27 सितंबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में संवाददाता सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 28 सितंबर को निर्वाचन आयोग के कार्यालय का घेराव किया जाएगा।झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि आज देश में सवाल केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण का नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे और प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा का है। मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम छूटना केवल एक प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि उसके लोकतांत्रिक अधिकार पर सीधा असर डाल सकता है।
उन्होंने कहा कि झारखंड में SIR के ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नामों के छूटने के बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। राज्य में दावे-आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 30 सितंबर तक बढ़ाई गई है। ऐसे समय में कांग्रेस यह सवाल उठा रही है कि क्या हर पात्र नागरिक को अपना नाम जांचने, दावा करने, आपत्ति दर्ज कराने और सुनवाई का पर्याप्त अवसर मिल रहा है?राकेश सिन्हा ने कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी सबसे बड़ी पूंजी जनता का विश्वास है। लेकिन SIR को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर ही निर्णय प्रक्रिया और आपत्तियों से संबंधित रिपोर्टों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, निर्वाचन आयुक्तों एस.एस. संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में SIR सहित विभिन्न निर्णयों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। निर्वाचन आयोग ने इन आंतरिक टिप्पणियों के अस्तित्व से इनकार नहीं किया है, हालांकि उसने इन्हें सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
उन्होंने कहा कि जब निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठें, जब मतदाता सूची से नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पर सार्वजनिक चिंता सामने आए और जब देश के नागरिकों के बीच चुनावी प्रक्रिया को लेकर संदेह पैदा हो, तब जवाबदेही तय होना आवश्यक है। लोकतंत्र में चुनाव आयोग सवालों से ऊपर नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेह संवैधानिक संस्था है।राकेश सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस स्पष्ट रूप से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। कांग्रेस का यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन इसी मांग और मतदाता के अधिकारों की रक्षा के सवाल को लेकर चल रहा है। 25 सितंबर को भी देश के विभिन्न राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग का काम सरकार या किसी राजनीतिक दल की सुविधा के अनुसार नहीं, बल्कि संविधान और मतदाता के अधिकार के अनुसार चलना चाहिए। चुनाव लोकतंत्र का उत्सव तभी रह सकता है जब मतदाता सूची निष्पक्ष हो, पात्र नागरिक का नाम सुरक्षित हो, अपात्र नामों की जांच पारदर्शी हो और हर नागरिक को अपना पक्ष रखने का समान अवसर मिले।
मीडिया प्रभारी ने कहा कि 27 सितंबर के सभी जिला मुख्यालयों के संवाददाता सम्मेलनों के माध्यम से कांग्रेस निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े सवालों को जनता के बीच रखेगी। इसके बाद 28 सितंबर को राज्य क़े सभी जिलों मुख्यालय में प्रदर्शन होगा तथा रांची में निर्वाचन आयोग के कार्यालय का घेराव कर अपनी मांगों को मजबूती से उठाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का संघर्ष किसी व्यक्ति या संस्था को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए है। जिस वोट से सरकारें बनती हैं, उस वोट की सुरक्षा से बड़ा लोकतांत्रिक दायित्व कोई नहीं हो सकता।
