सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पटना हाईकोर्ट ने जारी की एसओपी;केस डायरी डिजिटल माध्यम से भेजने,मेडिकल रिपोर्ट पांच दिनों में जुटाने और अनावश्यक तारीखों पर रोक लगाने की व्यवस्था

पटनाः बिहार की निचली अदालतों से लेकर पटना हाईकोर्ट तक में लंबे समय तक ज़मानत याचिकाओं पर होने वाली सुनवाई अब ब्रेक लगने वाला है।सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद पटना हाईकोर्ट ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक ऐतिहासिक और कड़ा एसओपी अपलोड कर दिया है।

नए आदेशों के बाद अब पुलिस अफसरों, वकीलों और स्वास्थ्य विभाग की मनमानी रोक लगेगी। अगर 60 दिनों (2 महीने) में बेल अर्जी का निपटारा नहीं हुआ, तो सीधे जज और अफसरों से जवाब मांग लिया जाएगा!एसओपी की 10 सबसे बड़ी महत्वपूर्ण बातें इस प्रकार हैं।

व्हाट्सएप पर केस डायरी भेजी जाएगी।अब केस डायरी के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पडेग का जमाना गया! हर थाने के 'कोर्ट नायाब' को पीपी/एपीपी के साथ व्हाट्सएप और ईमेल पर डिजिटल स्कैन कॉपी भेजनी होगी। डीएसपी लेवल के नोडल अफसर इसकी कमान संभालेंगे।

इंजरी रिपोर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट या फॉरेंसिक रिपोर्ट के लिए डॉक्टर या फॉरेंसिक लैब अब देर नहीं कर सकेंगे। 5 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करना होगी। ऐसा न करने पर कोर्ट तुरंत सख्त दंडात्मक कार्रवाई करेगी।

हाईकोर्ट और सिविल कोर्ट के सॉफ्टवेयर में बेल अर्जियों पर 'रेड फ्लैग' लगेगा। 30, 60 और 90 दिनों के हिसाब से मामलों की लिस्टिंग होगी। 60 दिन से पुराने मामलों को प्राथमिकता देकर तुरंत निपटाया जाएगा।साथ ही वकीलों के कहने पर अब आसानी से तारीख नहीं मिलेगी। केवल बेहद असाधारण परिस्थितियों में ही जज कारण दर्ज करके तारीख दे सकेंगे।

याचिका दाखिल होने के बाद उसमें कमियां निकालने और उन्हें सुधारने के लिए अधिकतम 72 घंटे की समय-सीमा तय कर दी गई है।पीड़ित या शिकायतकर्ता को नोटिस भेजने और तामील कराने की रिपोर्ट 5 दिनों के भीतर कोर्ट में देनी होगी।

निचली अदालत के जजों को हर महीने जिला जज को रिपोर्ट देना होगा कि कितनी जमानत याचिकाऐ आई और कितनी निपटाई गई। 2 महीने से अधिक देरी हुई तो फैसले में ही देरी की वजह बतानी होगी।

जिला स्तरीय डीएलएमसी बैठक में उन पुलिसकर्मियों, नायाब और जांच अधिकारियों का नाम सीधा डीएम और एसपी के सामने रखा जाएगा, जिन्होंने रिपोर्ट जमा करने में ढिलाई बरती।अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों से तुरंत मेडिकल रिपोर्ट मंगवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव से हर जिले में नोडल अफसर तैनात करने को कहा गया है।

हाईकोर्ट में जमानत याचिकाओं का बोझ बांटने के लिए रोजाना 5 से दस जमानत याचिकाऐ सभी सिंगल जजों की पीठ के सामने सूचीबद्ध किए जाएंगे, ताकि जल्द से जल्द राहत मिल सके।

व्यक्तिगत आजादी से जुड़े मामलों में बिना वजह की देरी अब बर्दाश्त नहीं होगी।सुप्रीम कोर्ट के आदेश (अन्ना वामन भलेराव बनाम महाराष्ट्र सरकार) के अनुपालन में पटना हाईकोर्ट का कड़ा कदम।

पटना से आनंद कुमार की रिपोर्ट