पटना:बिहार केIPSअधिकारी आदित्य कुमार को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT)की पटना पीठ से राहत नहीं मिली है. तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम पर फोन कराकर दबाव डालने के मामले में उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई को रद्द करने से अधिकरण ने इनकार कर दिया है. हालांकि, CATने राज्य सरकार को जांच प्रक्रिया में तेजी लाते हुए छह महीने के भीतर इसे पूरा करने का निर्देश दिया है.
न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जोहरी और प्रशासनिक सदस्य कुमार राजेश चंद्र की पीठ ने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान अधिकारी को अपना पक्ष रखने और बचाव करने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए. साथ ही,जांच को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता.
विभागीय आरोपपत्र को दी थी चुनौती
आदित्य कुमार ने 25 मार्च 2025 को जारी विभागीय आरोप पत्र को चुनौती देते हुए उसे रद्द करने की मांग की थी. उन्होंने आरोप पत्र जारी करने में देरी और दुर्भावना का हवाला भी दिया था. इसके अलावा,उन्होंने अपने कनिष्ठ अधिकारियों के समान डीआईजी पद पर प्रोन्नति के लिए विचार किए जाने की मांग की थी.
2022 में दर्ज हुआ था मामला
आदित्य कुमार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU)में वर्ष 2022 में मामला दर्ज होने के बाद विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी. यह मामला उस समय का है,जब वह गया के एसएसपी थे. उन पर शराब बरामदगी के मामले को गंभीरता से नहीं लेने,अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों पर नियंत्रण की कमी और थानों के निरीक्षण जैसी जिम्मेदारियों के निर्वहन में लापरवाही के आरोप भी लगे थे.
CATने कहा कि आपराधिक कार्यवाही लंबित होने के बावजूद सरकार अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच कर सकती है.
गौरतलब है कि गृह विभाग ने पिछले सप्ताह आदित्य कुमार के विरुद्ध एक अन्य विभागीय कार्यवाही समाप्त कर दी थी. वर्तमान में वह बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-14 के समादेष्टा हैं.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
