MUZAFFARPUR :बिहार में बाढ़ ने दस्तक दे दी है। इस बीच कई जिलों से बाढ़ से बेबसी की तस्वीरें आ चुकी है। बाढ़ से बचाव को लेकर कई लोग ऊंची जगहों पर शरण ले रहे हैं तो कुछ लोग पलायन कर रहे हैं लेकिन आज हम मुजफ्फरपुर की वो तस्वीर दिखाने जा रहे हैं, जिस तस्वीर को देखकर हरिद्वार की तस्वीर याद आ जाएगी।

उत्तर बिहार में उफनायी नदियां

तस्वीरें देखकर आप अंदाजा लगा सकेंगे कि यहां के लोगों का सांसद और विधायक ने कितना विकास किया है। विकास के दावे की पोल खोलती तस्वीर जिले के औराई प्रखंड की है, जहां बागमती नदी के जलस्तर बढ़ने के बाद अतरार और मधुबन प्रताप का चचरी बागमती नदी में समा गई है। जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी हैं।

बागमती की तेज धारा में बह गया चचरी पुल, लाखों लोगों का प्रखंड मुख्यालय से टूटा संपर्क

बागमती की तेज धारा में बह गया चचरी पुल

वायरल तस्वीरों में साफ तौर से देख सकते हैं कि चचरी पुल के दोनों तरफ लोग अपने-अपने मुकाम तक पहुंचने के लिए जा रहे थे। इस बीच लगातार बागमती नदी के जलस्तर में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही थी। अचानक चचरी पुल बागमती नदी में समा गई, जिसके बाद भगदड़ मच गई। लोगों ने अपनी सूझबूझ से अपनी जान बचायी।

वहीं, बताया जाता है कि अंतरार, अमनौर, सरहचिया, डीह जीवर, सहिलाबल्ली, परमजीवर, महेश्वारा पंचायत समेत लाखों लोगों का चचरी पुल से प्रखंड मुख्यालय का सम्पर्क टूट गया है। अब 30 किलोमीटर घूमकर लोग प्रखंड मुख्यालय पहुंचेंगे। आजादी से लेकर आजतक सिर्फ सत्ता पर बैठे राजनेताओं ने पुल निर्माण का झांसा देकर सिर्फ वोट बैंक बनाया लेकिन कोई विकास नहीं की।

वहीं, इस मामले पर ग्रामीण दिनबंधु क्रांतिकारी ने बताया कि लोग आजादी के पहले से देखते आ रहे हैं। यहां हर साल बाढ़ के दौरान लोगों का प्रखंड मुख्यालय और जिला मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है। 8 पंचायत के लोगों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क 16 पंचायत के लोगों का जिला मुख्यालय का सम्पर्क टूट जाता है। आज तक कोई भी सांसद और विधायक इस गांव के संपर्क को नहीं जोड़ पाया है, जिसकी वजह से हर साल सम्पर्क जोड़ने के‌ लिए बागमती नदी पर चचरी पुल बनाया जाता है, जो बाढ़ के दौरान पानी में बह जाता है।