पटना:बिहार की अर्थव्यवस्था में पिछले13वर्षों के दौरान महत्वपूर्ण बदलाव आया है. राज्य में खेती,वानिकी और मछलीपालन की तुलना में उद्योग से जुड़े क्षेत्रों की हिस्सेदारी बढ़ गई है. योजना एवं विकास विभाग के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार,वर्ष2024-25में राज्य के सकल मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में उद्योग से जुड़े द्वितीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी23.57प्रतिशत रही,जबकि कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी22.37प्रतिशत दर्ज की गई.
राज्य की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र अब भी सबसे आगे है. वर्ष2024-25में सेवा क्षेत्र का योगदान54.07प्रतिशत रहा. इसमें व्यापार,परिवहन,बैंकिंग,संचार,होटल,लोक प्रशासन और अन्य सेवाएं शामिल हैं.
*9.92लाख करोड़ रुपये रही अर्थव्यवस्था*
आंकड़ों के मुताबिक,वर्ष2024-25में बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) चालू कीमतों पर9.92लाख करोड़ रुपये रहा. इसी अवधि में खेती,वानिकी और मछलीपालन का योगदान लगभग2.15लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया. वहीं,निर्माण,विनिर्माण,बिजली और पानी की आपूर्ति जैसी गतिविधियों को शामिल करने वाले द्वितीयक क्षेत्र का योगदान करीब2.23लाख करोड़ रुपये रहा.
*13वर्षों में बदली आर्थिक तस्वीर*
वर्ष2011-12में बिहार के जीएसवीए में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग25.7प्रतिशत थी,जो2024-25में घटकर22.37प्रतिशत रह गई. इसके विपरीत,उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी18.8प्रतिशत से बढ़कर23.57प्रतिशत हो गई. सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी55.5प्रतिशत से घटकर54.07प्रतिशत पर पहुंची,लेकिन यह सबसे बड़ा क्षेत्र बना हुआ है.
*रोजगार और निवेश पर नजर*
उद्योग की बढ़ती हिस्सेदारी बिहार के आर्थिक ढांचे में बदलाव का संकेत है. हालांकि,इसका वास्तविक लाभ रोजगार,निवेश और लोगों की आय में कितना बढ़ेगा,यह आने वाले वर्षों में स्पष्ट होगा. कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाना भी राज्य के विकास के लिए अहम बना रहेगा.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
