देवघरःदेवघर विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यहां पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ विराजमान हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम देश के52शक्तिपीठों में से एक भी है। मान्यता है कि इसी स्थान पर माता सती का हृदय गिरा था। ऐसी भी मान्यता है कि जिस स्थान पर माता सती का हृदय गिरा,उसी स्थान पर पवित्र ज्योतिर्लिंग स्थापित है। यही वजह है कि बाबा बैद्यनाथ धाम में भगवान शिव और माता शक्ति की एक साथ पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। नवरात्र के दौरान बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने से श्रद्धालुओं को शिव और शक्ति,दोनों की आराधना का पुण्य प्राप्त होता है।
सप्तमी से नवमी तक बंद रहते हैं तीन मंदिर के पट
नवरात्र के दौरान जहां देशभर के मंदिरों और पूजा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाओं के दर्शन के लिए पट खोल दिए जाते हैं,वहीं बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर में एक अलग परंपरा का पालन किया जाता है। यहां माता पार्वती के स्वरूप में स्थापित त्रिपुर सुंदरी,कामाख्या स्वरूपा माता संध्या और मां काली के मंदिरों के पट सप्तमी से नवमी तिथि तक बंद रहते हैं।
इस अवधि में न तो स्थानीय पुरोहित और न ही आम श्रद्धालु इन तीनों मंदिरों में स्थापित देवी-विग्रहों का प्रत्यक्ष स्पर्श कर पूजा-अर्चना कर सकते हैं। बाबा बैद्यनाथ धाम के सरदार पंडा पंडित गुलाबानन्द ओझा के अनुसार,इस दौरान तीनों मंदिरों के पुजारी जनकल्याण की कामना से तांत्रिक विधि-विधान के तहत पूजा-अर्चना करते हैं।
दर्पण में दर्शन कर पूजा करते हैं पुरोहित
सरदार पंडा पंडित गुलाबानन्द ओझा ने बताया कि बाबा मंदिर की परंपरा के अनुसार,नवरात्र में मां काली,माता पार्वती और माता संध्या के मंदिरों के पट बंद रहने के दौरान पुरोहित दर्पण के माध्यम से देवी-विग्रहों के दर्शन करते हैं। इसी माध्यम से वे प्रतिदिन की पूजा-अर्चना संपन्न करते हैं। नवमी के बाद तीनों मंदिरों के पट श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिए जाते हैं। इसके बाद भक्त माता के दर्शन कर सामान्य रूप से पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
शिव और शक्ति की संयुक्त आराधना का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ धाम की विशेषता भगवान शिव और माता शक्ति की संयुक्त उपस्थिति है। यही कारण है कि इस पवित्र तीर्थस्थल में पूजा-अर्चना को विशेष फलदायी माना जाता है। नवरात्र के दौरान यहां की परंपराएं श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था और आकर्षण का केंद्र बनी रहती हैं।
देवघर से उपेंद्र कुमार की रिपोर्ट

