JDU को तीन सीटों पर हार, निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत से बढ़ी हलचल

पटना: बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव परिणाम आने के बाद एनडीए के भीतर सियासी खींचतान तेज हो गई है। जदयू की करारी हार और भाजपा की ओर से निर्दलीय प्रत्याशियों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश ने गठबंधन के अंदर तनाव बढ़ा दिया है। इस बीच भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी के बयान ने विवाद को और हवा दे दी है।

निर्दलीय MLC के समर्थन को लेकर JDU ने जताई नाराजगी

विधान परिषद की आठ सीटों पर हुए चुनाव में जदयू को अपने हिस्से की चार सीटों में से तीन पर हार का सामना करना पड़ा। वहीं, सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज और तिरहुत स्नातक सीट से वंशीधर ब्रजवासी की जीत के बाद भाजपा की ओर से उन्हें समर्थन देने और पार्टी से जोड़ने की पहल की गई। इस पर जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने आपत्ति जताई है।

राजीव प्रताप रूडी के बयान से बढ़ा विवाद

विवाद उस समय और बढ़ गया जब भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने राजपूत नेताओं को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बिहार में ऐसा कोई राजपूत नेता नहीं है, जिसके कहने पर इस समाज के लोग किसी पार्टी को वोट दें। रूडी की यह प्रतिक्रिया सारण शिक्षक सीट से जदयू के पराजित प्रत्याशी आनंद पुष्कर के आरोप के बाद आई। पुष्कर ने आरोप लगाया था कि भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी, जनार्दन सिंह सिग्रीवाल और राधामोहन सिंह ने गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया और चुनाव में उनकी मदद नहीं की।

अभिषेक झा ने भी लगाया सियासी चक्रव्यूह रचने का आरोप

दूसरी ओर तिरहुत स्नातक सीट से जदयू प्रत्याशी अभिषेक झा ने भी एनडीए के भीतर उनके खिलाफ चक्रव्यूह रचे जाने का आरोप लगाया है। वंशीधर ब्रजवासी की भाजपा में वापसी की कोशिश पर भी जदयू ने सवाल उठाए हैं।

5 नवंबर को JDU की अहम बैठक, सामने आ सकता है पार्टी का रुख

जदयू ने चुनाव परिणामों की समीक्षा के लिए पांच नवंबर को बैठक बुलाई है। इसके बाद पार्टी अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर सकती है। वहीं, चिराग पासवान और संतोष सुमन ने निर्दलीय निर्वाचित सदस्यों के किसी दल को समर्थन देने पर आपत्ति नहीं जताई है। अब एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद एनडीए के भीतर बढ़ती राजनीतिक खींचतान पर सबकी नजरें टिकी हैं।

पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट