रांची: जिन हाथों में कभी AK-47 जैसे घातक हथियार हुआ करते थे, आज उन्हीं हाथों में हुनर के औजार हैं। कभी पुलिस के लिए चुनौती रहे और कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहे नक्सली अब जेल में रहकर अपने भविष्य को नई दिशा देने की तैयारी कर रहे हैं। झारखंड के हजारीबाग स्थित नक्सली आत्मसमर्पित जेल में बंद नक्सलियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं।

कभी बुंडू और तमाड़ के इलाकों में नक्सली गतिविधियों के कारण दहशत का माहौल रहता था। पुलिस के लिए भी इन क्षेत्रों में अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण होता था। लेकिन अब कुंदन पाहन और महाराज प्रमाणिक जैसे पूर्व नक्सली अपने जीवन में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं।

कभी AK-47 से दहशत फैलाने वाले नक्सली अब सीख रहे मुर्गी पालन और सिलाई-कढ़ाई, हजारीबाग जेल में बदल रही जिंदगी

कुंदन पाहन ने मुर्गी पालन का प्रशिक्षण लिया
जेल में कुंदन पाहन ने मुर्गी पालन के साथ सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जेल आईजी की ओर से उन्हें प्रमाण पत्र भी सौंपा गया। वहीं, मुकेश गंझू और महाराज प्रमाणिक ने भी मुर्गी पालन का प्रशिक्षण लिया है।

महिला बंदियों में प्रिशिला देवी, प्रेमशीला हेंब्रम और किरण टुडू ने सिलाई-कढ़ाई का कोर्स पूरा किया है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य बंदियों को ऐसा हुनर देना है, जिससे वे जेल से बाहर निकलने के बाद सम्मानजनक तरीके से अपना जीवनयापन कर सकें।

कभी AK-47 से दहशत फैलाने वाले नक्सली अब सीख रहे मुर्गी पालन और सिलाई-कढ़ाई, हजारीबाग जेल में बदल रही जिंदगी
100 कॉटेज में रह रहे हैं 123 नक्सली
करीब 200 एकड़ क्षेत्र में फैले इस नक्सली आत्मसमर्पण जेल में कुल 100 कॉटेज बनाए गए हैं। वर्तमान में यहां 123 नक्सली बंद हैं। इनमें 13 नक्सली दंपत्ति भी शामिल हैं, जो यहां साथ रहते हैं।

कंप्यूटर और ब्यूटीशियन के प्रशिक्षण की व्यवस्था
इस जेल में बंदियों को केवल मुर्गी पालन और सिलाई-कढ़ाई ही नहीं, बल्कि कंप्यूटर और ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसका मकसद बंदियों को शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना है।

कभी हथियारों के दम पर अपनी पहचान बनाने वाले इन पूर्व नक्सलियों के लिए अब हुनर ही नई पहचान बनने की उम्मीद है। जेल में चल रहे ये प्रशिक्षण कार्यक्रम उनके पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में लौटने की दिशा में एक पहल के रूप में देखे जा रहे हैं।

रांची से नैयर की रिपोर्ट