22 से 28 सितंबर तक झारखंड में 'विश्व रेबीज जागरूकता सप्ताह' मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम है— 'स्ट्रॉन्गर टुगेदर' यानी मिलकर प्रयास करना! स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम का यह संदेश साफ़ है— रेबीज लाइलाज भले लगे, लेकिन समय पर उपचार और पूर्ण टीकाकरण से इससे पूरी तरह बचाव संभव है। झारखंड में डॉग-बाइट के मामले लगातार डरा रहे हैं! राज्यभर के अस्पतालों में रोजाना 200 से 250 नए-पुराने मरीज पहुंच रहे हैं। अकेले रांची सदर अस्पताल में ही इस साल जनवरी से जून के बीच 52,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए! पलामू से लेकर धनबाद मेडिकल कॉलेज तक— जहाँ पिछले महीने महज एक दिन में 134 लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगानी पड़ी— यह स्थिति हम सबको सतर्क करने के लिए काफी है।

तो फिर बचाव क्या है? आइए जानते हैं स्वास्थ्य विभाग की जरूरी सलाह:

  • तुरंत धोएं: जानवर के काटने या खरोंचने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते हुए साफ पानी से धोएं।

  • घरेलू नुस्खों से बचें: घाव पर भूलकर भी मिर्च, तेल या कोई अन्य घरेलू चीज न लगाएं।

  • समय पर टीका लें: बिना देर किए नजदीकी एंटी-रेबीज क्लिनिक पहुंचें और डॉक्टर की सलाह से टीकाकरण का पूरा कोर्स जरूर लें।

  • पालतू जानवरों का रखें ख्याल: अपने घर के पालतू जानवरों का भी नियमित टीकाकरण करवाएं।