झारखंड और बिहार में आतंक का पर्याय बन चुके प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन TSPC का सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता मारा गया है! उत्तर प्रदेश ATS की टीम ने वाराणसी में एक मुठभेड़ के दौरान इस खूंखार नक्सली को ढेर कर दिया है। बृजेश गंझू पर झारखंड सरकार और NIA को मिलाकर कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था.उत्तर प्रदेश ATS के डिप्टी एसपी विपिन राय के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों को पुख्ता जानकारी मिली थी कि झारखंड का यह टॉप वांटेड उग्रवादी कमांडर वाराणसी के रास्ते मुगलसराय की ओर जाने वाला है। इस इनपुट के आधार पर ATS की टीम ने तड़के करीब 5 बजे ही संबंधित इलाके की कड़ी घेराबंदी कर ली थी।
तकरीबन सुबह 5 बजे जब पुलिस ने एक संदिग्ध मोटरसाइकिल सवार को रुकने का इशारा किया, तो उसने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।मुठभेड़ इतनी भीषण थी कि उग्रवादी की ओर से चलाई गई गोलियां सीधे ATS के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण के सीने पर लगीं। गनीमत यह रही कि दोनों अधिकारियों ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी, जिससे उनकी जान बाल-बाल बच गई। एहतियात के तौर पर दोनों अधिकारियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी स्थिति पूरी तरह सामान्य बताई जा रही है।इसके बाद ATS की जवाबी कार्रवाई में बृजेश गंझू गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा। पुलिस उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले गई, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र के लूटू गांव निवासी बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता के रूप में हुई है। बृजेश गंझू पर लेवी वसूलने, सुरक्षा बलों पर हमले करने, टेरर फंडिंग और निर्माण कार्यों में लगे ठेकेदारों व कारोबारियों की हत्या और अपहरण के दर्जनों संगीन मामले दर्ज थे। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA भी लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी।मुठभेड़ के बाद स्थानीय पुलिस और ATS की संयुक्त टीमों ने आसपास के इलाके को सील कर सघन सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है ताकि उसके अन्य सहयोगियों और शरणदाताओं का पता लगाया जा सके।
