गयाजी: बिहार के गयाजी की धरती पर इन दिनों सिर्फ देश ही नहीं,बल्कि दुनिया के कई देशों की आस्था भी नजर आ रही है. पितृपक्ष मेला महासंगम-2026में रूस,यूक्रेन,जर्मनी,इटली,लातविया और अफ्रीका समेत कई देशों से विदेशी श्रद्धालु पहुंचे हैं. कोई अपने माता-पिता के लिए पिंडदान करने आया है,तो कोई अपने परिवार और दिवंगत मित्रों की आत्मा की शांति के लिए गयाजी की पवित्र धरती पर कर्मकांड कर रहा है.
देवघाट पर विदेशी श्रद्धालुओं ने पंडितों के मार्गदर्शन में पिंडदान और तर्पण की प्रक्रिया पूरी की. इस दौरान विदेशी महिलाओं का भारतीय परिधान साड़ी में पिंडदान करना भी आकर्षण का केंद्र रहा. भाषा और देश भले अलग रहे,लेकिन कर्मकांड के दौरान श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ सनातन परंपरा का पालन करते दिखाई दिए.
गयाजी में पिंडदान की धार्मिक मान्यता से प्रभावित होकर कई विदेशी श्रद्धालुओं ने यहां आने का फैसला किया. पहले गयाजी आकर पिंडदान कर चुके विदेशी लोगों के अनुभवों ने भी दूसरे श्रद्धालुओं को यहां आने के लिए प्रेरित किया है.
सनातनधर्मी लोकनाथ गौड़ के नेतृत्व में विदेशों से श्रद्धालुओं के गयाजी आने का सिलसिला पहले भी रहा है. इस बार भी रूस और यूक्रेन से लेकर यूरोप और अफ्रीकी देशों तक से लोग पितृपक्ष में शामिल होने पहुंचे हैं.
इन श्रद्धालुओं में उम्रदराज महिलाएं भी हैं और युवा भी. खास बात यह है कि कुछ विदेशी श्रद्धालु पितृकर्म की परंपरा को पूरी निष्ठा से निभाने के लिए निर्जला रहकर पिंडदान करने की तैयारी में हैं.
गयाजी के देवघाट पर विदेशी श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने पितृपक्ष मेले को एक अलग पहचान दी है—जहां देश की सीमाएं पीछे छूट जाती हैं और पितरों की शांति की कामना लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से लोग एक ही धार्मिक परंपरा में शामिल होते दिखाई दे रहे हैं.
गयाजी से मनोज सिंह की रिपोर्ट-
