पटना : बिहार में पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने वाले शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया गया है. अब शोध गंगा पोर्टल पर पीएचडी थीसिस की सॉफ्ट कॉपी अपलोड किए बिना शोधार्थियों को पीएचडी की डिग्री नहीं मिल सकेगी. राज्यपाल एवं कुलाधिपति सचिवालय ने इस संबंध में राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को स्पष्ट निर्देश दिया है.
निर्देश के अनुसार,पीएचडी की मौखिक परीक्षा संपन्न होने के एक सप्ताह के भीतर संबंधित शोधार्थी का शोध प्रबंध शोध गंगा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही विश्वविद्यालयों को अब तक अपलोड की गई थीसिस की रिपोर्ट भी राज्यपाल सचिवालय को सौंपनी होगी.
दरअसल,विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने शोध कार्यों में टीवी चोरी रोकने,पारदर्शिता बढ़ाने और शोध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से थीसिस को शोध गंगा पोर्टल पर उपलब्ध कराना अनिवार्य किया है. हालांकि,बिहार के कई विश्वविद्यालयों में इस प्रक्रिया की धीमी रफ्तार पर राज्यपाल सचिवालय ने नाराजगी जताई है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार,राज्य के विश्वविद्यालयों में पहले से पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर चुके 20,152 शोधार्थियों की थीसिस पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है,जबकि करीब 50 हजार थीसिस अपलोड करने का काम अभी बाकी है.
मगध विश्वविद्यालय,वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय,जयप्रकाश विश्वविद्यालय,बीएन मंडल विश्वविद्यालय,कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय,मुंगेर विश्वविद्यालय,पूर्णिया विश्वविद्यालय और तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय समेत अन्य संस्थानों को लंबित कार्य जल्द पूरा करने को कहा गया है.
शोध गंगा एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी है,जहां शोध प्रबंध सुरक्षित रखे जाते हैं. इससे शोधार्थियों,शिक्षकों और देश-विदेश के शोधकर्ताओं को अकादमिक सामग्री उपलब्ध होती है. इस व्यवस्था का उद्देश्य शोध में पारदर्शिता,गुणवत्ता और मौलिकता को बढ़ावा देना है.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
