पटना : बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड) ने अपने लोकप्रिय डेयरी ब्रांड सुधा की असम एवं अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में बाजार उपस्थिति को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है. असम के तेजपुर (सोनितपुर) के जामुगुड़ीहाट, शांतिपुर स्थित कन्यका डेयरी में 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले दूध प्रसंस्करण संयंत्र का उद्घाटन असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने किया. इस अवसर पर कॉम्फेड के चेयरमैन-सह-प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक भी उपस्थित रहे.

तेजपुर में 20 हजार लीटर प्रतिदिन उत्पादन क्षमता के संयंत्र का उद्घाटन

नया संयंत्र तेजपुर और आसपास के क्षेत्रों में सुधा उत्पादों की आपूर्ति को मजबूत करने के साथ क्षेत्रीय वितरण नेटवर्क के विस्तार में मदद करेगा. कॉम्फेड बढ़ती मांग को देखते हुए प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के साथ खुदरा वितरण नेटवर्क को भी व्यापक बना रहा है.

तेजपुर में 20 हजार लीटर प्रतिदिन उत्पादन क्षमता के संयंत्र का उद्घाटन

गुवाहाटी इकाई ने 121.17 करोड़ रुपये का किया कारोबार

कॉम्फेड ने नवंबर 2018 में गुवाहाटी के अमीनगांव स्थित एक थर्ड-पार्टी डेयरी संयंत्र के माध्यम से सुधा पैकेट दूध एवं दुग्ध उत्पादों का विपणन शुरू किया था. इसके बाद गतिविधियों का विस्तार असम के अन्य क्षेत्रों के साथ पड़ोसी राज्यों मेघालय एवं अरुणाचल प्रदेश तक हुआ.

तेजपुर में 20 हजार लीटर प्रतिदिन उत्पादन क्षमता के संयंत्र का उद्घाटन

वर्तमान में कॉम्फेड की गुवाहाटी इकाई लगभग 2,200 खुदरा विक्रेताओं के माध्यम से सुधा के विभिन्न उत्पादों का विपणन कर रही है. इनमें पैकेट दूध, दही, पनीर, मट्ठा, पेड़ा एवं मिल्क केक प्रमुख हैं. इकाई द्वारा प्रतिदिन औसतन करीब 50,500 लीटर दूध की बिक्री की जा रही है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में गुवाहाटी इकाई ने 121.17 करोड़ रुपये का कारोबार किया और 8.06 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया.

इसी क्रम में कॉम्फेड ने असम में अपना स्वयं का डेयरी प्रसंस्करण यूनिट स्थापित करने की दिशा में भी कदम उठाया है. प्रस्तावित यूनिट की क्षमता एक लाख लीटर प्रतिदिन होगी. इसके लिए असम सरकार से उपयुक्त भूमि आवंटित करने का अनुरोध किया गया है. असम इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एआईडीसी) ने संभावित स्थलों की पहचान कर कॉम्फेड के अधिकारियों को निरीक्षण एवं विचार के लिए दिखाया है.

पूर्वोत्तर में सुधा दूध एवं अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता और बढ़ी बिक्री से ग्रामीण स्तर पर दुग्ध सहकारी संघों की अधिक दुग्ध खरीद को स्थायित्व मिलने तथा भविष्य में मूल्यवर्धित उत्पादों के लिए नई संभावनाएं पैदा होने की उम्मीद है.