रांची। झारखंड विधानसभा के पूरे दिन की कार्यवाही आज हंगामें की भेंट चढ गयी। वजह थे दो मुद्दे। एक तो हेमंत सोरेन सरकार की नयी नियोजन नीति और दूसरा रहा नमाज के लिए कमरे का आवंटन जो सियासी नमाज बन गया। पिछले लंबे समय से राजनीतिक रुप से वनवास में रह रही बीजेपी के लिए ये दोनों मुद्दें किसी संजीवनी से कम नहीं है। एक ओर सदन में उसके विधाय़क हंगामा कर रहे हैं तो दूसरी ओर, प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश राज्य भर में इसके लिए आन्दोलन खडा कर रहे हैं।

झारखंड में विधानसभा का मॉनसून सत्र चल रहा है। लेकिन पहले दिन सदन की पूरी कार्यवाही हंगामें की भेंट चढ गयी। विपक्ष ने पूरे दिन सदन को चलने नहीं दिया। बार बार सदन की कार्यवाही स्थगित करने के बाद आखिरकार तीन बजे ही सदन की कार्यवाही अगले दिन के लिए स्थगित करनी पडी। पहले यह समझे कि आखिर ये दोनों मुद्दे हैं क्या...

नमाज के लिए कमरे का आवंटन

2 सितम्बर को झारखंड विधानसभा में नमाज पढ़ने के लिए टीडब्लू 348 कमरा नंबर नमाज के लिए आवंटित हुआ था। इस संबंध में विधानसभा की ओर से आवंटन संबंधी पत्र भी जारी किया। उसी के बाद से मामला तूल पकड रहा है। बीजेपी के विधायक विरंची नारायण ने हनुमान चालीसा पढने के लिए भी कमरा आवंटित करने की मांग की तो पूर्व मंत्री सीपी सिंह ने परिसर में हनुमान मंदिर बनाने की मांग कर दी। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि यह कोई नयी व्यवस्था नहीं है। विधानसभा में विधायक और कर्मचारी जो पांच वक्त की नमाज पढते हैं, उसी के लिए कमरा आवंटित किया गया।

नई नियोजन नीति

हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य में नयी सरकारी नियुक्तियों को लेकर नई नियोजन नीति बनायी थी। इससे पहले जब रघुवर दास की सरकार थी तो भी एक नियोजन नीति बनी थी। लेकिन हेमंत सोरेन सरकार ने उससे अलग जो नई नीति बनायी है उसमें जसने झारखंड से मैट्रिक और इंटरमीडिएट पास किया है वैसे ही अभ्यर्थियों को ही राज्य में नौकरी मिलेगी। साथ ही इसमें से कई भाषाओं को भी हटा दिया गया है। बीजेपी का आरोप है कि राज्य में दो भाषा हिन्दी और अंग्रेजी में ही पढाई होती है और सरकार ने नयी नियुक्ति नियमावली में से हिन्दी को हटा दिया है। ऐसा करने से झारखंड के मूलवासियों को कोई लाभ नहीं होगा। वहीं सरकार का कहना है कि नयी नियोजन नीति में राज्य की क्षेत्रीय भाषाओं को जोडा गया है। यानि यहां की जो भाषा है उसे ही लिया गया है, किसी बाहरी भाषा को शामिल नहीं किया गया है।

बीजेपी मुद्दा भुनाने में जुटी

बीजेपी इन दोनों मुद्दों को अब भुनाने में जुट गयी है। सदन से अलग पार्टी के प्रदेश नेतृत्व अब राज्य बर में इसे आन्दोलन का रुप देने में जुट गया है। खासकर नियोजन नीति को लेकर। क्योंकि बीजेपी ने जिस तरह से विधानसभा चुनाव में अपना जनाधार खोया, उससे नेताओं को लगता है कि जनता की कृपा पाने के लिए जनता का ही मुद्दा चुनकर जनता की शरण में जाना होगा।