चंद्रप्रकाश चौधरी नहीं बन सके मिनिस्टर, आखिर अब आगे क्या होगा ?

गिरिडीह लोकसभा से चंद्रप्रकाश चौधरी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की. मुकाबला कांटों भरा था,लेकिन यहां की आवाम ने आजसू को ही जीत का सेहरा बांधा. इस विजय की वजह और कुछ नहीं बल्कि बीजेपी का साथ और पीएम मोदी का ब्रांड था.इस जीत के बाद चर्चा काफ़ी थी की आजसू को भी मोदी मंत्रीमंडल में जगह मिलेगी.लेकिन ऐसा नहीं हो सका.झारखण्ड में बीजेपी कोटे से ही दो मंत्री अन्नापूर्णा देवी और संजय सेठ बनाए गए.मंत्रीमंडल में जगह नहीं मिलने से आजसू खेमे में नाराजगी और अंदर ही अंदर एक मलाल,मायूसी,बगावत और विरोध पनप रहा है. आगे झारखंड विधानसभा चुनाव भी है, ऐसी सूरत में आजसू को किनारा करना भाजपा की भूल और गलती होगी. पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी और आजसू दोनों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा और सत्ता खिसक गई थी. सवाल ये भी है कि बीजेपी के लिए आजसू की सबसे ज्यादा जरुरत विधानसभा चुनाव में ही है. और अगर इसबार भी गठजोड़ नहीं होता है, तो फिर इस मिलाप का कोई मतलब नहीं, बल्कि बेमतलब ही साबित होगा.बुनियादी बात यही है कि आजसू का बड़ा वोट बैंक कुर्मी -महतो है, जो इस प्रदेश में हर जगह अपनी एक दखल रखते हैं .हालांकि, सियासत का एक फलसफा है, जो वक्त के साथ करवट और अपनी तासीर बदलते रहती है. ऐसा ही कुछ बदलाव जयराम की पार्टी JBKSS के उभार से भी हुआ. इस उदयीमान पार्टी का वोट बैंक महतो -कुर्मी ही है. लाजमी है कि इससे आजसू को फर्क कहीं न कहीं पड़ेगा, जबकि, पिछली बार ऐसी हालत और सूरत नहीं थी. जिस तरह से JBKSS का प्रदर्शन लोकसभा चुनाव में रहा. वह एक आहट और अनुमान बता गई कि इसबार कैसी स्थिति विधानसभा चुनाव में होगी ?

मोदी की टीम में चंद्रप्रकाश को नहीं मिला मौका, अब आगे क्या ?

बीजेपी-आजसू गठबंधन जरूरी भी मजबूरी भी

एक अनुमान के अनुसार झारखण्ड की ओबीसी आबादी 55 प्रतिशत बताई जाती है, जिसमें वैश्य 25 और यादव आबादी 10 प्रतिशत बताई जाती है. इन समीकरण को देखते हुए बीजेपी ने संजय सेठ और अन्नपूर्णा देवी को मिनिस्टर बनाया गया. संजय सेठ वैश्य और अन्नपूर्णा देवी यादव बिरादरी से आती हैं.आजसू का वोट बैंक कुर्मी -महतो है, जिसकी भी एक अच्छी खासी आबादी राज्य में है. सरकारी कागजों में 16 प्रतिशत से ज्यादा इसकी आबादी बतायी जाती है, जबकि दावा 25 फीसदी किया जाता है. बात पते की ये भी है कि कुर्मी -महतो मतदाता राज्य की लगभग 30 से ज्यादा विधानसभा में अपनी पकड़ और दखल रखते हैं जो किसी का भी खेल बना और बिगाड़ सकते हैं. आगे मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार में चंद्रप्रकाश चौधरी मिनिस्टर बनने की हसरत और ख्वाहिशें परवान चढ़ती हैं कि नहीं ये देखने वाली बात हैं. लेकिन,अगर हकीकत की जमीन टटोले तो बीजेपी और आजसू दोनों का साथ रहना जरुरी और मज़बूरी दोनों हैं , क्योंकि अगर 2019 की तरह अलग -अलग विधानसभा चुनाव लड़ते हैं, तो बहुत हद तक वही परिणाम सामने आ सकते हैं. लिहाजा इससे नुकसान दोनों का ही है. गौरतलब है कि आजसू को केंद्र की राजनीति से उतना मतलब नहीं, जितना राज्य की सियासत उसके लिए मायने रखती है.

बेरमो से पंकज की रिपोर्ट.