झारखंड हाईकोर्ट ने एक नाबालिग को अवैध हिरासत में रखने के मामले में बड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के गृह सचिव और डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब कर लिया है! मामला रांची के डोरंडा थाना का है। फिरोज नाम के शख्स ने हाईकोर्ट में एक हेवियस कॉर्पस यानी 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' याचिका दाखिल की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने उनके 17 साल के नाबालिग बेटे को 4 सितंबर 2026 से बिना किसी एफआईआर के अवैध रूप से थाने में बंधक बनाकर रखा।परिवार की ओर से कोर्ट में जन्म प्रमाण पत्र पेश किया गया, जिसमें साबित हुआ कि लड़के की जन्मतिथि 21 अप्रैल 2009 है और वह नाबालिग है। लेकिन आरोप है कि पुलिस ने सारे कागजात ताक पर रख दिए, उसकी उम्र 19 साल बताकर उसे बालिग करार दिया और चुपचाप न्यायिक हिरासत यानी जेल भेज दिया।
जब इस मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई, तो अदालत ने सच्चाई सामने लाने के लिए डोरंडा थाना परिसर का सीसीटीवी फुटेज मांगा। लेकिन थाना प्रभारी फुटेज पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहे!इस पर अदालत का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। हाईकोर्ट ने रांची में खराब और बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों की स्थिति पर तीखा सवाल उठाया। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि शहर की सड़कों और चौराहों पर सीसीटीवी का चालू रहना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि रांची एसएसपी को पहले ही सभी थानों के सीसीटीवी दुरुस्त करने का आदेश दिया गया था, जिसकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई है।
पुलिस की इस लापरवाही और मनमानी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने अब राज्य के गृह सचिव और डीजीपी को आगामी 12 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का सख्त निर्देश दिया है।
