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JHARKHAND NEWS : JSSC-JPSC के 22 परीक्षाएं रद्द: झारखंड सरकार का बड़ा कदम, अब सीआईडी करेगी 23 परीक्षाओं की जांच

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क्या सरकारी नौकरियों के इम्तिहान अब महज़ एक छलावा बन कर रह गए हैं? एक के बाद एक कई बड़ी और महत्वपूर्ण परीक्षाओं पर धांधली के गंभीर साए मंडरा रहे हैं। अब इन मामलों में बड़ा एक्शन लेते हुए राज्य सरकार ने कई विज्ञापनों और वर्षों की परीक्षाओं की सीआईडी (CID) जाँच के आदेश दे दिए हैं। आखिर कौन-सी हैं वे परीक्षाएं, जिन पर अब कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है?

भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों के बीच, सरकार और जांच एजेंसियों ने अपनी सुई उन तमाम विज्ञापनों की तरफ घुमा दी है, जो पिछले डेढ़ दशक से विवादों के घेरे में रहे हैं। इस लिस्ट में साल 2010 से लेकर 2025 तक की कई बहुप्रतीक्षित परीक्षाएं शामिल हैं।

आइए एक नजर डालते हैं उन प्रमुख परीक्षाओं पर, जिनकी अब सीआईडी जांच होगी:

  • शुरुआती और पुराने विवादित मामले: इसमें साल 2010 की कमर्शियल टैक्स लिमिटेड परीक्षा (10/2010), साल 2013 की पांचवीं सिविल सेवा परीक्षा (06/2013) और साल 2015 की सिविल जज जूनियर, सिविल जज जूनियर विशेष, सॉयल कंजर्वेटर, सहायक निदेशक कृषि (नियमित और बैकलॉग) जैसी परीक्षाएं शामिल हैं।

  • साल 2016 से 2018 के बीच की परीक्षाएं: इस कड़ी में फूड सेफ्टी ऑफिसर, डेंटिस्ट बेसिक कैडर (02/2016), सिविल सेवा परीक्षा-2016 (23/2016 व बैकलॉग 27/2017), जियोलॉजिस्ट व केमिस्ट रेगुलर (01/2017 व 02/2017), एपीपी (03/2018) और सिविल जज जूनियर रेगुलर (12/2018) की जांच की जाएगी।

  • हालिया और आधुनिक परीक्षाएं (2019 - 2025): हाल के वर्षों की बात करें तो संयुक्त असिस्टेंट इंजीनियर (05/2019), सिविल सर्विस परीक्षा-2021 (01/2021), और डेंटल डॉक्टर रेगुलर (01/2022) के साथ-साथ साल 2025 के कई विज्ञापन—जैसे फैक्ट्री इंस्पेक्टर (01/2025), बॉयलर इंस्पेक्टर (02/2025), उपनिदेशक प्रोसिक्यूशन (03/2025), प्रोजेक्ट मैनेजर (04/2025), फूड एनालिस्ट (05/2025) और निदेशक (07/2025) पद की परीक्षाएं भी इस दायरे में हैं।

    यह फेहरिस्त सिर्फ कागजों पर दर्ज कुछ नंबर नहीं हैं, बल्कि यह लाखों उन युवाओं के भविष्य का सवाल है जिन्होंने दिन-रात एक करके इन परीक्षाओं की तैयारी की थी। सिविल सेवाओं से लेकर तकनीकी पदों, मेडिकल और कृषि सेक्टर से जुड़े इन तमाम विज्ञापनों की सीआईडी जांच से अब यह उम्मीद जग रही है कि पर्दाफाश होगा कि आखिर सिस्टम में सेंध कहां लगी थी। क्या पेपर लीक हुए थे, कॉपियों में हेराफेरी हुई थी या फिर चयन प्रक्रिया में कोई अंदरूनी गड़बड़ी थी—इन तमाम सवालों के जवाब अब जांच एजेंसी तलाशेगी।

    बेरोजगार युवाओं और ईमानदार अभ्यर्थियों की निगाहें अब सीआईडी की इस विशेष जांच पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि इस उच्च स्तरीय जांच से कितने दूध का दूध और पानी का पानी होता है, और क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई करके युवाओं का सिस्टम से फिर से भरोसा बहाल हो पाता है।