झारखंड से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है! राज्य के उन होनहार युवाओं के लिए जो यूपीएससी की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) पास कर चुके हैं, सरकार ने वित्तीय मदद बढ़ाने का ऐलान किया था। मदद की रकम 1 लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई। आवेदन करने की आखिरी तारीख भी 3 जुलाई थी। लेकिन, पूरे राज्य से जानते हैं कितने आवेदन आए? सिर्फ चार! जी हाँ, मात्र 4 अभ्यर्थियों ने इस योजना के लिए आवेदन किया है। सरकार का उद्देश्य साफ़ था कि एससी और एसटी वर्ग के ज्यादा से ज्यादा छात्र मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू की बेहतर तैयारी कर सकें। इसके लिए बड़ा कदम उठाते हुए पारिवारिक वार्षिक आय की सीमा को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 8 लाख रुपये कर दिया गया था। इतनी बड़ी राहत मिलने के बावजूद, आवेदनों का आंकड़ा दहाई की संख्या तक भी नहीं पहुँच पाया। इस पर सवाल उठना लाज़मी है कि आखिर इतनी अच्छी योजना धरातल पर क्यों फेल हो गई?

इस पूरे मामले के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण सामने आ रहे हैं:

  1. प्रचार-प्रसार की कमी: दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले योग्य छात्रों तक इस योजना, बढ़े हुए फायदों और आवेदन प्रक्रिया की समय पर सही जानकारी ही नहीं पहुँच पाई।

  2. दोहरी सहायता का नियम: नियमों के मुताबिक, जो छात्र केंद्र सरकार या किसी अन्य योजना से पहले ही आर्थिक मदद ले रहे हैं, वे इसके पात्र नहीं हैं।

  3. पीटी में सफल छात्रों की कम संख्या: झारखंड से यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले एससी-एसटी अभ्यर्थियों की कुल संख्या का कम होना भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है।इस पूरे मामले पर राज्य के कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा है कि इस वर्ष योजना की राशि और आय सीमा दोनों बढ़ाई गई थीं, फिर भी आवेदन इतने कम क्यों आए, इसका गहन विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही, भविष्य में इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है।