भोजपुर/पटना:एक समय था जब ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को रोजगार पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता था.हुनर और काबिलियत होने के बावजूद उनके लिए विकल्प काफी सीमित होते थे.परंतु बिहार सरकार की दूरदर्शी सोच और नीतियों के कारण अब यह तस्वीर बदल गई है.अब इसी बिहार में महिला सशक्तीकरण के मद्देनजर जीविका सुधा बिक्री केंद्र खोले जा रहे हैं.जिसके तहत जीविका दीदी अपनी ही पंचायत में सुधा ब्रांड के दूध, दही, घी और अन्य डेयरी उत्पादों की बिक्री कर आर्थिक रुप से आत्मनिर्भर बनेंगी.इसी बदलाव की कड़ी की सशक्त मिसाल बनी हैं पिंकी दीदी, जिन्होंने अपनी सफलता की कहानी के जरिए राज्य में महिलाओं के लिए बदलते सकारात्मक परिवेश की तस्वीर पेश की है.

हुनर को मिल रही रोजगार की उड़ान, महिला सशक्तिकरण की नई राह बना जीविका सुधा बिक्री केंद्र

कैसे बदली पिंकी दीदी की जिंदगी

पिंकी दीदी भोजपुर जिला के उदवंतनगर गांव की रहने वाली हैं. पिंकी दीदी बताती हैं कि वो वर्ष2017में पार्वती सहायता समूह से जुड़ी थी. समूह से जुड़ने के बाद20हजार रुपए लेकर अपना दुकान चलाना शुरू किया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में बदलाव आया.

आगे पिंकी दीदी बताती हैं कि“मेरा पहले बैंक में खाता भी नहीं था. जब मैं जीविका से जुड़ी तब बैंक में मेरा पहली बार खाता खुला. इसके बाद महिला रोजगार के तहत60हजार रुपए मिले, जिससे मैंने डीप फ्रिजर खरीदा. इसके बाद मैंने जीविका सुधा बिक्री केंद्र खोला. जिसमें सुधा का घी, रसगुल्ला, दही, दूध, छाछ बेचने लगी. जीविका ने मुझे आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर होने का एक नया रास्ता दिया है. बिहार सरकार की इस योजना ने वाकई हमारी जिंदगी बदल दी है.“

चांदनी देवी ने भी बताई अपनी कहानी

पिंकी दीदी की तरह हीं चांदनी देवी की कहानी भी बेहद संघर्षपूर्ण रही है. बक्सर जिले के खुटहा पंचायत अंतर्गत मझरिया गांव की रहने वाली चांदनी देवी ने बताया कि वह हीरा जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी है. जहां उन्हें जीविका सुधा बिक्री केंद्र ने खुद के स्थायी आजीविका गतिविधि से जुड़ने का अवसर प्रदान किया. अब वे नियमित आय और सम्मानजनक आजीविका की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.“

जीविका सुधा बिक्री केंद्र के लिए क्या हैं आवश्यक शर्तें-

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत8053 ग्राम पंचायतों में जीविका सुधा बिक्री केंद्र स्थापित किए जाने हैं. सरकार जीविका दीदीयों को महिला रोजगार के अंतर्गत60 हजार की सहायता राशि प्रदान कर रही है. इस राशि का उपयोग करके डीप फ्रीजर, विजी कूलर, ब्रांडिंग, परिवहन सहायता, दुकान की पेंटिग और अन्य जरुरी सुविधाओं के विकास में किया जाएगा. वहीं महिला लाभार्थियों को अपनी ओर से15 हजार रुपए का अंशदान करना होगा. इस तरह से कुल75 हजार रुपए के निवेश से आप अपना बिक्री केंद्र शुरु कर सकते हैं. इसके अलावा बिक्री केंद्र के लिए आवेदन करने वाली महिलाओं को जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य होना अनिवार्य है, साथ ही अपने पंचायत क्षेत्र में स्वयं की या किराये की दुकान उपलब्ध होनी चाहिए, जहां केंद्र का संचालन किया जा सके. इस योजना का उदेश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराना और गांवों में सुधा उत्पादों को आसानी से उपलब्ध कराना है.