बिहार विद्यालय परीक्षा समिति यानी बिहार बोर्ड के तीन कर्मचारियों के खिलाफ फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र के आधार पर वर्षों से नौकरी करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पटना के कोतवाली थाने में हरिमोहन यादव, माधव यादव और शिव कुमार यादव के खिलाफ अलग-अलग FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
मामला बोर्ड की ओर से कर्मचारियों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन के दौरान सामने आया। सेवा समायोजन की प्रक्रिया के दौरान तीनों कर्मचारियों द्वारा जमा कराए गए प्रमाण पत्र संबंधित शिक्षण संस्थानों को भेजकर सत्यापित कराए गए थे। सत्यापन के दौरान संबंधित संस्थानों के सक्षम प्राधिकार ने प्रमाण पत्र अपने यहां से जारी किए जाने से इनकार कर दिया।
इसके बाद बिहार बोर्ड के प्रभारी प्रशाखा पदाधिकारी की ओर से कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दी गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीनों कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
बोर्ड के अनुसार,तीनों कर्मचारियों की नियुक्ति वर्ष 1994-95 के दौरान पदचर के पद पर हुई थी। बाद में 3 अक्टूबर 2016 को उनकी सेवा का समायोजन किया गया। इसी प्रक्रिया के दौरान शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया था।
शिकायत के मुताबिक शिव कुमार यादव की नियुक्ति 1 जुलाई 1995, माधव यादव की 1 जुलाई 1994 और हरिमोहन यादव की नियुक्ति 1 अप्रैल 1995 को हुई थी। तीनों ने वर्ष 2005 में शैक्षणिक प्रमाण पत्र जमा किए थे। फिलहाल पुलिस दस्तावेजों और सत्यापन रिपोर्ट की जांच कर आगे की कार्रवाई में जुटी है।
बिहार से वरिष्ठ संवाददाता संजय कुमार की रिपोर्ट

