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छठी मइया की महिमा के साथ समानता और मानवता का संदेश देगा नया छठ गीत ‘सबसे अनोखा बड़ी छठी मइया हमार’
पटना: लोक आस्था और सूर्य उपासना के महापर्व छठ की महिमा को एक खास संदेश के साथ जन-जन तक पहुंचाने के लिए नया छठ गीत ‘सबसे अनोखा बड़ी छठी मइया हमार’ प्रस्तुत किया जा रहा है। गायिका सिमरन श्रुति की मधुर आवाज में सजे इस गीत को सुप्रसिद्ध गीतकार मनोज भावुक ने लिखा है। यह गीत छठी मइया की महिमा का गुणगान करने के साथ-साथ समाज को समानता, आपसी प्रेम, समरसता और मानवता का संदेश भी देता है।
जाति और भेदभाव से ऊपर है छठी मइया की भक्ति
इस गीत की सबसे खास बात इसका सामाजिक संदेश है। गीत के माध्यम से बताया गया है कि छठी मइया की भक्ति में न कोई जाति का भेद है और न ही कोई छोटा-बड़ा। उनकी नजर में सभी भक्त समान हैं। छठ महापर्व समाज के हर वर्ग, हर जाति और हर व्यक्ति की सामूहिक आस्था का प्रतीक है।
गीत यह संदेश देता है कि छठी मइया के दरबार में सच्ची श्रद्धा और पवित्र मन का महत्व है। इस पूजा में बिना किसी पुरोहित या पंडित के भी श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई उपासना स्वीकार्य है। छठ का यह स्वरूप इसे अन्य पर्वों से अलग और विशेष बनाता है।
नदी,तालाब से लेकर स्विमिंग पूल तक,हर जगह स्वीकार्य है सच्ची आस्था
आज छठ महापर्व की पहचान बिहार और भारत की सीमाओं से निकलकर पूरी दुनिया में फैल चुकी है। विदेशों में रहने वाले भारतीयों के साथ-साथ दूसरे देशों के लोग भी इस पर्व में श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग लेते हैं।
गीत में छठ पूजा के इसी वैश्विक स्वरूप को खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है। इसमें बताया गया है कि नदी हो, तालाब हो, स्विमिंग पूल हो या कोई अन्य स्थान, सच्चे मन से दिया गया अर्घ्य छठी मइया की भक्ति और आस्था का प्रतीक है।
डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा में छिपा है जिंदगी का बड़ा संदेश
इस गीत का सबसे भावपूर्ण और प्रेरणादायक संदेश डूबते और उगते सूर्य की उपासना से जुड़ा है। दुनिया जहां उगते सूर्य को प्रणाम करती है, वहीं छठ महापर्व में पहले डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
यह परंपरा जीवन की एक बड़ी सीख देती है कि सम्मान केवल सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने वालों का ही नहीं, बल्कि मुश्किल दौर से गुजर रहे और जीवन में ढलान का सामना कर रहे लोगों का भी होना चाहिए।
डूबते सूर्य को अर्घ्य देना सिखाता है कि किसी व्यक्ति का सम्मान उसकी सफलता या असफलता से तय नहीं होना चाहिए। हर परिस्थिति में इंसान की गरिमा और उसके योगदान का सम्मान होना चाहिए।
सिमरन श्रुति और मनोज भावुक की खास प्रस्तुति
‘सबसे अनोखा बड़ी छठी मइया हमार’ के जरिए गायिका सिमरन श्रुति और गीतकार मनोज भावुक ने छठ की पारंपरिक आस्था को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का प्रयास किया है।
यह गीत केवल धार्मिक भावनाओं को अभिव्यक्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में एकता, समानता, भाईचारे और इंसानियत की भावना को मजबूत करने का संदेश भी देता है।
गायिका सिमरन श्रुति ने श्रोताओं से अपील की है कि वे इस गीत को जरूर सुनें, अपना प्यार और आशीर्वाद दें तथा इसके सकारात्मक संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। ‘सबसे अनोखा बड़ी छठी मइया हमार’ का संदेश साफ है—छठी मइया की भक्ति में सभी समान हैं और सम्मान का अधिकार हर इंसान को है।
पटना से नीरज उपाध्याय की रिपोर्ट
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