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बिहार विधानसभा बनी डिजिटल और पेपरलेस, NeVA के सफल क्रियान्वयन से विधायी कामकाज में आई तेजी

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Deepak Kumarलेखक

265अत्याधुनिक टचस्क्रीन टैबलेट से लैस हुआ सदन,विधायकों को ऑनलाइन प्रश्न भेजने और विधायी दस्तावेज देखने की सुविधा;अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार के निर्देशन में डिजिटल व्यवस्था को मिली गति
पटना: बिहार विधानसभा की विधायी कार्यप्रणाली को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (NeVA) के सफल क्रियान्वयन से विधानसभा का कामकाज तेजी से डिजिटल और पेपरलेस व्यवस्था की ओर बढ़ा है। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार के निर्देशन और लगातार समीक्षा के परिणामस्वरूप सदन की कार्यवाही, विधायी प्रक्रियाओं और दस्तावेजों के प्रबंधन में डिजिटल तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय की NeVA परियोजना के तहत विधानसभा में आवश्यक डिजिटल आधारभूत संरचना विकसित कर ली गई है। इससे विधायी कार्यों में पारदर्शिता, कार्यकुशलता और समयबद्धता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

265 टचस्क्रीन टैबलेट से लैस हुआ विधानसभा सदन
सदन की कार्यवाही को पेपरलेस बनाने के लिए भौतिक और तकनीकी अवसंरचना तैयार की गई है। इसके तहत विधायकों की सीटों पर टैब स्टैंड के साथ 265 अत्याधुनिक टचस्क्रीन टैबलेट स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा अत्याधुनिक सर्वर रूम, डिजिटल हाउस के लिए समर्पित रैक रूम, बिजनेस केबिन और प्रोजेक्ट रूम-सह-प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण पूरा हो चुका है। विधानसभा में पोर्टेबल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग स्टूडियो भी स्थापित किया गया है, जबकि स्थायी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष का निर्माण कार्य जारी है। NeVA के सुचारु संचालन के लिए जनवरी 2025 से 30 कुशल तकनीकी कर्मियों की टीम लगातार कार्यरत है।

ऑनलाइन होगी प्रश्न और विधायी कार्यों की प्रक्रिया
NeVA के विभिन्न सॉफ्टवेयर मॉड्यूल के माध्यम से विधानसभा की दैनिक कार्यसूची, कार्यवृत्त और विधायी प्रक्रियाओं का डिजिटल प्रबंधन किया जा रहा है।
प्रश्न प्रसंस्करण मॉड्यूल के माध्यम से तारांकित, अतारांकित और अल्पसूचित प्रश्नों को ऑनलाइन प्रस्तुत करने, लॉटरी और बैलेटिंग की प्रक्रिया तथा संबंधित विभागों द्वारा ऑनलाइन उत्तर भेजने की व्यवस्था लागू की गई है। इसके साथ ही ध्यानाकर्षण सूचनाओं, शून्यकाल और कार्यस्थगन प्रस्तावों का भी डिजिटल माध्यम से प्रसंस्करण किया जा रहा है। इससे विधायी कामकाज को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिल रही है।

mNeVAऐप से 24घंटे उपलब्ध रहेंगे विधायी दस्तावेज
सदस्य पोर्टल और mNeVA मोबाइल ऐप के माध्यम से विधायकों को उनके जीवन-वृत्त, आसन विन्यास और विभिन्न विधायी दस्तावेजों की 24 घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। वहीं, मीडिया एवं लोक पोर्टल के माध्यम से सदन की कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जा रहा है। आम नागरिक भी प्रश्नों और उत्तरों को ऑनलाइन देख सकते हैं। विधेयक प्रबंधन और डिजिटल अभिलेखागार के माध्यम से विधायी विधेयकों को ऑनलाइन अपलोड किया जा रहा है। इसके अलावा 18वीं बिहार विधानसभा के विधायी अभिलेखों का डिजिटलीकरण कर उन्हें सुरक्षित किया गया है, जिससे भविष्य में भी इन दस्तावेजों का उपयोग किया जा सकेगा।

विधायकों और कर्मचारियों को दिया जा रहा तकनीकी प्रशिक्षण
NeVA व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए विधानसभा सचिवालय की ओर से चरणबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
अक्टूबर 2025: तकनीकी एवं प्रशासनिक कर्मियों, डाटा एंट्री ऑपरेटर, कनीय लिपिक, आशुलिपिक और निजी सहायकों को डेटा प्रविष्टि का प्रशिक्षण दिया गया।
जनवरी 2026: विधायकों और उनके निजी सहायकों को ऑनलाइन प्रश्न भेजने, कार्यसूची देखने और mNeVA ऐप के इस्तेमाल की जानकारी दी गई।
जून 2026: प्रशाखा पदाधिकारियों, अवर सचिवों, उप सचिवों, रिपोर्टर संवर्ग, नोडल अधिकारियों और आईटी प्रबंधकों को ऑनलाइन उत्तर भेजने की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया।
2 से 4 नवंबर 2026: विधायकों के निजी सहायकों के लिए विधानसभा सचिवालय के विस्तारित भवन स्थित NeVA सेवा केंद्र में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य विधायकों और विधानसभा सचिवालय के कर्मचारियों को डिजिटल व्यवस्था के अनुरूप तकनीकी रूप से दक्ष बनाना है।

कागज की खपत और मुद्रण खर्च में आएगी कमी
NeVA के सफल क्रियान्वयन से बिहार विधानसभा के विधायी कार्यों में गति, पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है। डिजिटल माध्यम से दस्तावेजों के प्रबंधन के कारण कागज की खपत और मुद्रण खर्च में भी कमी आई है। इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

बिहार विधानसभा ने डिजिटल तकनीक को अपनाकर विधायी कार्यप्रणाली को अधिक सुगम, त्वरित और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह पहल न केवल विधानसभा के कामकाज को तकनीक से जोड़ रही है, बल्कि आम जनता के लिए भी विधायी प्रक्रियाओं को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाने में सहायक साबित हो रही है।

पटना से राजीव रंजन की रिपोर्ट

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