BIHAR POLITICS
बिहार में दो निर्दलीय MLC की सदस्यता पर संकट! BJP में शामिल होने के दावे से मचा सियासी विवाद, विपक्ष ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
बंशीधर बृजवासी और राहुल राज को पहले बीजेपी की सक्रिय सदस्यता देने का दावा,फिर प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने बदला बयान;दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता का मामला उठा
पटना: बिहार विधान परिषद के चुनाव परिणाम आने के बाद अब दो नवनिर्वाचित निर्दलीय विधान पार्षदों की सदस्यता को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित बंशीधर बृजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीते राहुल राज के बीजेपी में शामिल होने की खबर सामने आने के बाद विपक्ष ने दल-बदल कानून का मुद्दा उठाया है। इस मामले में दोनों की विधान परिषद सदस्यता पर अयोग्यता का सवाल खड़ा हो गया है।
दरअसल, शनिवार को बीजेपी विधानमंडल दल की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों को 200 रुपये की सक्रिय सदस्यता की रसीद सौंपी। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर दोनों नेताओं के बीजेपी में शामिल होने की जानकारी दी।
हालांकि, इस पोस्ट के करीब दो घंटे बाद ही प्रदेश अध्यक्ष ने एक दूसरा पोस्ट जारी किया। इसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों नेताओं ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण नहीं की है, बल्कि पार्टी को समर्थन देने का निर्णय लिया है। बयान में आए इस बदलाव के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया।
क्या कहता है संविधान का दल-बदल कानून?
इस पूरे मामले में भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची चर्चा के केंद्र में है। इसके पैरा 2(2) के अनुसार, यदि कोई निर्दलीय निर्वाचित सदस्य चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण करता है, तो वह सदन की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
हालांकि, दोनों नेताओं ने वास्तव में राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण की है या केवल समर्थन दिया है, यह विवाद का मुख्य कानूनी प्रश्न है। इस संबंध में अयोग्यता पर निर्णय लेने का अधिकार विधान परिषद के सभापति को है।
मनोज झा ने सभापति से कार्रवाई की मांग की
आरजेडी सांसद मनोज झा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों विधान पार्षदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग विधान परिषद के सभापति के समक्ष उठाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। वहीं, जनसुराज नेता एवं अधिवक्ता अमित कुमार ने भी मामले में कानूनी कार्रवाई की बात कही है।
बीजेपी ने सदस्यता नहीं,समर्थन देने की कही बात
दूसरी ओर, बीजेपी प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि दोनों विधान पार्षदों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण नहीं की है, बल्कि बीजेपी को समर्थन देने का फैसला किया है। पार्टी की ओर से इसी आधार पर अयोग्यता के आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखा जा रहा है।
सभापति के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल इस पूरे प्रकरण में दो अलग-अलग दावे सामने हैं। एक तरफ बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की शुरुआती पोस्ट में सदस्यता ग्रहण करने की जानकारी दी गई थी, वहीं बाद की पोस्ट में इसे समर्थन बताया गया। दूसरी तरफ विपक्ष इसे दल-बदल कानून के दायरे में लाने की मांग कर रहा है।
अब इस मामले में विधान परिषद के सभापति के समक्ष उठने वाले सवाल और उपलब्ध दस्तावेज अहम होंगे। अंतिम निर्णय संवैधानिक प्रावधानों और संबंधित तथ्यों के आधार पर लिया जाएगा।
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट
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