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अमेरिकी विदेश मंत्री की भारतीय उद्योगपतियों से मुलाकात पर सुधाकर सिंह ने उठाए सवाल, PM को लिखा पत्र

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Deepak Kumarलेखक

बक्सर सांसद ने भारत की संप्रभुता और विदेश नीति की स्वायत्तता पर जताई चिंता,अदाणी,टाटा और अंबानी से मुलाकातों का विवरण मांगा

नई दिल्ली/बक्सर: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारतीय उद्योगपतियों के साथ हुई मुलाकातों को लेकर राजनीतिक सवाल उठने लगे हैं। बिहार के बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इन मुलाकातों के उद्देश्य,विदेश मंत्रालय की भूमिका और भारत की विदेश नीति की स्वायत्तता को लेकर चिंता जताई है।

सांसद ने गौतम अदाणी,टाटा संस के एन. चंद्रशेखरन और मुकेश अंबानी के साथ मार्को रुबियो की मुलाकातों का विवरण मांगा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि इन बैठकों के दौरान भारत सरकार और विदेश मंत्रालय की औपचारिक भूमिका क्या थी।

भारतीय उद्योगपतियों से मुलाकातों पर मांगा जवाब

सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में अमेरिकी विदेश मंत्री की भारतीय उद्योगपतियों के साथ बैठकों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इन मुलाकातों के उद्देश्य और उनमें हुई चर्चाओं की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।

सांसद ने पूछा है कि क्या इन बैठकों में भारत सरकार,विशेषकर विदेश मंत्रालय,की औपचारिक भागीदारी और समन्वय था। उन्होंने यह भी जानना चाहा है कि क्या इन मुलाकातों में भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मुलाकात पर भी सवाल

सुधाकर सिंह ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के मुंबई जाकर मार्को रुबियो से मुलाकात करने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस दौरान हुई बातचीत का विवरण मांगा है।

सांसद ने ऊर्जा सुरक्षा,तेल आयात,अमेरिकी प्रतिबंधों और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जानकारी देने की मांग की है। उनका सवाल है कि इन मुद्दों पर हुई बातचीत में भारत के राष्ट्रीय हितों को किस तरह प्राथमिकता दी गई।

विदेशी अधिकारियों और भारतीय कंपनियों की बैठकों के लिए दिशानिर्देश बनाने की मांग

सांसद सुधाकर सिंह ने विदेशी अधिकारियों और भारतीय कंपनियों के बीच होने वाली रणनीतिक बैठकों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार करने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसी बैठकों में पारदर्शिता और सरकारी समन्वय सुनिश्चित किया जाना चाहिए,खासकर जब चर्चा ऊर्जा सुरक्षा,व्यापार और राष्ट्रीय रणनीतिक हितों से जुड़े विषयों पर हो।

उन्होंने भारत की विदेश नीति की स्वतंत्रता और निर्णय लेने की स्वायत्तता को महत्वपूर्ण बताते हुए सवाल उठाया कि राष्ट्रीय हितों से जुड़े मामलों में कॉरपोरेट समूहों की भूमिका और सरकारी नीति के बीच स्पष्ट अंतर कैसे सुनिश्चित किया जा रहा है।

विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों पर बहस

सुधाकर सिंह ने अपने पत्र के जरिए यह मुद्दा उठाया है कि भारत की विदेश नीति किसी कॉरपोरेट घराने की रणनीति का विस्तार नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से संबंधित बैठकों के उद्देश्य और उनमें विदेश मंत्रालय की भूमिका पर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है।

फिलहाल, सांसद द्वारा उठाए गए सवालों पर प्रधानमंत्री कार्यालय या संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है। इन मुलाकातों के वास्तविक एजेंडे और चर्चा के विषयों को लेकर आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पटना से नीरज उपाध्याय की रिपोर्ट

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