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ज्यो - ज्यों दवा की मर्ज बढता ही गया

PATNA -बिहार में शराबबंदी कानून के पांच वर्ष पूरे होने पर पिछले 26 नबंबर को मुख्य मंत्री एक बार फिर सख्त एलान किया था कि वे शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करगें ही इस कानून का उल्लंघन करने वालो को किसी भी कीमत पर नही छोड़ने का एलान भी किया था. नीतीश के इस दृढ इच्छा शक्ति का अहसास तब और मजबूत हो गया था जब उन्होनें कड़क मामने जाने वाले आई ए एस अधिकारी के के पाठक को एक बार फिर उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की जिम्मेवारी दी .

सी एम नीतीश के इस एलान का असर भी दिख रहा है. शऱाबबंदी कानून पर दसवीं बार 16 नवंबर को मुख्यमंत्री के द्वारा की गयी समीक्षा बैठक करने के तुरंत बाद राजधानी पटना समेत सभी जिलो की पुलिंस हरकत में आयी और बड़े शराब माफिया मो0 मुर्शीद कानून के फंदे में आया तो हजारो जगह पर पुलिस की छापामारी यहां तक कि शादी समारोहों के अवसर पर दुल्हन के कमरो में भी पुलिस कर्मी शराब की बोतले खोजते दिखे.

लेकिन बिहार विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में 30 नबबंर को विधान सभा परिसर में मिली शराब की बोतलो ने पुलिसिया कार्रवाई के पूरे अभियान की एक तरह से हवा निकाल दी. शायद इसी का परिणाम था कि विधान सभा के अंदर मुख्यमंत्री ने इसकी जांच करने का आदेश मुख्य सचिव और डी जी पी को दिया. हालांकि इस मामले की जांच कर रहे राज्य के दोनो मुख्य अधिकारी की रिपोर्ट तो अभी नही आयी है लेकिन इसके बाद 5 दिसंबर को वैशाली जिले में तीन लोगो की हुई असायमिक मौत ने एक बार फिर पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है.

बिहार में शराबबंदी कानून को पूरी तरह फेल बताने वाला विपक्ष और उसके नेता तेजस्वी यादव लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि राज्य में सरकार में शामिल नेता और अफसर ही इस कानून की धज्जिया उड़ा रहे हैं.विधान सभा के बजट सत्र में तेजस्वी ने राज्य सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामसूरत राय के भाई का मामला उठाया था उनके स्कूल में भारी मात्रा शराब मिलने का आरोप लगाया था. इस मुद्दे को लेकर कई दिनो तक विपक्षी सदस्यो ने हंगामा भी किया और सदन की कार्यवाही भी ठप की . इस मामले को लेकर बैक फूट पर आयी सरकार के मंत्री रामसूरत राय ने इस पर सदन में सफाई भी दी .

लेकिन फिर भी यह मामला अभी तक ठंढा नही हो पाया है कि नीतीश के ही विधायक गोपालमंडल ने अपनी ही पार्टी के भागलपुर के जद यू सासंद अजय मंडल पर दारू बेचवाने का आरोप लगाया है.भागलपुर के इस्लामपुर में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए गोपालमंडल ने शराबबंदी और नशाबंदी की चर्चा की. इसी कड़ी में उन्होने भागलपुर के सांसद अजय मंडल पर आरोप लगाते हुए कहा कि यहां जो ट्रेक्टर पर दारू भेजते है और अफीम की खेती करते हैं वह हमारे सांसद है.

वही अपनी पार्टी के विधायक द्वारा ही लगाये गये आरोप पर जद यू सांसद अजय मंडल ने पलटवार करते हुए कहा कि जो जैसा है उसे वैसी ही दुनिया ही नजर आती है. यानी अजय मंडल भी अपने विधायक को खुद कटघरे में खड़ा करते हैं.

अब अपने मंत्रियो और विधायको और सांसदो पर लगे आरोप पर मुख्यमंत्री करे तो क्या करें. शराबबंदी कानून को पूरी तरह से लागू करने के लिये नीतीश ने क्या क्या नही किया. पुलिसिया कदम उठाये तो पूरे सूबे में शराब के खिलाफ अभियान भी चलाया विश्व का सबसे बड़ा मानव श्रृखला भी बनायी फिर भी अभी भी शराब माफिया और सरकार के बीच आंख मिचौली का खेल चल रहा है. यानि ज्यो - ज्यो दवा की मर्ज बढ़ता ही गया. शायद यही वजह है कि नीतीश अपनो के कारण ही विपक्ष के निशाने पर हैं.