खूंटी: झारखंड के खूंटी थाना क्षेत्र में तीन नाबालिग लड़कियों के साथ कथित दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। घटना सोमवार रात की बताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुछ युवक तीनों लड़कियों को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए और अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर उनके साथ जबरदस्ती की। पीड़िताओं में दो सगी बहनें भी शामिल बताई जा रही हैं। घटना सामने आने के बाद इलाके में चिंता का माहौल है। वहीं, इस मामले को लेकर राज्य में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

झामुमो-कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई का किया बचाव
घटना को लेकर झामुमो और कांग्रेस ने कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता राज्य के नागरिकों, खासकर महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सत्ता पक्ष का कहना है कि राज्य में जहां भी आपराधिक घटनाएं हो रही हैं, पुलिस उन पर कार्रवाई कर रही है और दोषियों की गिरफ्तारी भी की जा रही है।

सत्ता पक्ष ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भाजपा को बयान देने से पहले उत्तर प्रदेश और बिहार की स्थिति पर भी जवाब देना चाहिए। इन राज्यों में महिला अपराध की स्थिति और वहां की सरकारों की जवाबदेही पर भी भाजपा को बात करनी चाहिए। हालांकि, सत्ता पक्ष ने खूंटी की घटना को बेहद दुखद बताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।

भाजपा ने सरकार को घेरा, कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, भाजपा ने इस घटना को लेकर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा का आरोप है कि महागठबंधन सरकार ने 'मंईयां सम्मान योजना' के नाम पर सत्ता में वापसी तो की, लेकिन राज्य में महिलाएं और बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं।

भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि झारखंड में कानून का शासन कमजोर हो गया है और अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। पार्टी ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

महिला सुरक्षा पर फिर छिड़ी सियासी बहस
खूंटी की इस घटना ने एक बार फिर झारखंड में महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां सत्ता पक्ष पुलिस कार्रवाई और दोषियों की गिरफ्तारी का हवाला दे रहा है, वहीं विपक्ष सरकार को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेर रहा है।

फिलहाल इस मामले में पुलिस की आधिकारिक जांच और कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। ऐसे गंभीर मामले में पीड़िताओं की पहचान गोपनीय रखना और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

राजीव मोहन की रिपोर्ट