कटिहार में गंगा-महानंदा का कहर : 30 गांव नदी में समाए,25 हजार परिवार विस्थापित,स्थायी पुनर्वास का इंतजार
कटिहार: गंगा और महानंदा नदियों का कटाव लगातार लोगों के लिए बड़ी त्रासदी बनता जा रहा है। जिले में अब तक करीब 30 गांव और टोले नदी की धाराओं में समा चुके हैं। इसके चलते 25 हजार से अधिक परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन, घर और आजीविका गंवाकर विस्थापन का दर्द झेल रहे हैं।कटिहार में नदी अब केवल जमीन नहीं काट रही, बल्कि हजारों परिवारों की जिंदगी और पहचान का भूगोल बदल रही है।
कटाव ने सबसे ज्यादा मनिहारी, प्राणपुर, बरारी और अमदाबाद प्रखंड के लोगों को प्रभावित किया है। मनिहारी में मदारीचक, समदा, बैजनाथपुर, बोलिया दियारा और महेशपुर समेत कई गांव गंगा में विलीन हो चुके हैं। सड़क, विद्यालय और दूसरी सरकारी परिसंपत्तियां भी नदी के कटाव की चपेट में आ चुकी हैं।
प्राणपुर में महानंदा नदी ने कई गांवों का अस्तित्व मिटा दिया। जहां कभी हजारों लोगों की चहल-पहल रहती थी, वहां अब नदी की धारा बह रही है। बरारी में भी कई गांव कटाव की भेंट चढ़ चुके हैं। विस्थापित परिवार अलग-अलग स्थानों पर रहने को मजबूर हैं और नई बस्तियों में पुराने गांवों के नामों को जिंदा रखे हुए हैं।
अमदाबाद में वर्ष 1980 से लोग कटाव का दंश झेल रहे हैं। कई गांव नदी में समा चुके हैं। बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार आज भी तटबंध, सड़क और रेलवे लाइन किनारे अस्थायी झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं।
स्थायी पुनर्वास और मजबूत तटबंध की मांग लंबे समय से उठती रही है। प्रशासन के अनुसार 15 अगस्त को 900 परिवारों को बासगीत पर्चा देने की तैयारी है। हालांकि प्रभावित परिवारों का सवाल है कि उन्हें स्थायी और सुरक्षित आवास कब मिलेगा।
बिहार से वरिष्ठ संवाददाता संजय कुमार की रिपोर्ट





