झारखंड के जमशेदपुर से पर्यावरण प्रेम की एक बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है! बात चाहे भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की हो या फिर प्रकृति के प्रति अटूट प्रेम की, जमशेदपुर के कुदादा जंगल के पास के ग्रामीण इलाकों में रक्षाबंधन का एक अनोखा रूप देखने को मिला। यहाँ की महिलाओं ने कलाई पर राखी बांधने के साथ-साथ जंगलों को ही अपना भाई मान लिया और पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर पर्यावरण की रक्षा का दृढ़ संकल्प लिया। 'मेराकी संस्था' की संस्थापक और जानी-मानी समाजसेविका रीता पात्रों के नेतृत्व में यह अनूठी परंपरा पिछले कई सालों से लगातार निभाई जा रही है।
पारंपरिक परिधानों में सजी ये महिलाएँ हर साल जंगल पहुँचती हैं, पेड़ों की पूजा करती हैं, उनकी आरती उतारती हैं और यह संदेश देती हैं कि — 'जंगल है, तो हम हैं।' आधुनिकता की इस दौड़ में जहाँ वनों की कटाई चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं ग्रामीण महिलाओं का यह प्रयास समाज के लिए एक मिसाल है। पेड़ों को बचाने का यह संकल्प सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन बचाने की एक पुकार है। कुदादा जंगल से इस रक्षाबंधन ने पूरे देश को यह बता दिया है कि प्रकृति हमारी असली रक्षक है, और उसकी रक्षा करना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है।
