झारखंड में बहुचर्चित जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा में गड़बड़ी की जांच अब अपने सबसे निर्णायक दौर में पहुंच गई है। सीआईडी की एसआईटी (SIT) को जांच के दौरान कई चौंकाने वाले और अहम इनपुट हाथ लगे हैं, जिसके आधार पर पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जा रहा है। एसआईटी की जांच में यह बात सामने आई है कि 100 से अधिक ऐसे सफल अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर गलत तरीके से परीक्षा पास की है। इनमें से 10 अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अगले एक महीने के भीतर कई और लोगों की पहचान कर बड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। आपको बता दें कि परीक्षा में गड़बड़ी की जांच शुरू होने के पिछले दो महीनों में कुल 36 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि अब तक जेएसएससी के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है।

मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए सीआईडी ने परीक्षा संचालन एजेंसी 'आईसीएन' (ICN) के गिरफ्तार संचालक मिथिलेश सिंह तक पहुंचने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में, आईसीएन के कर्मचारी सोमांश और राहुल कुमार को दोबारा रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। इनसे मिलने वाली जानकारियों के आधार पर एसआईटी उस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है, जिसके जरिए अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उन्हें पास कराया गया था।जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार किए गए अधिकांश आरोपी अभय तिवारी के सिंडिकेट से जुड़े हुए थे। पुलिस ने इस मामले में अभय तिवारी, उनकी पत्नी, भाई समेत कई अन्य लोगों और एजेंटों (जैसे मनु कुमार सिंह, सुधाकर यादव और राजन कुमार) को गिरफ्तार किया है।

पीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ी की जांच कर रही सीआईडी की कार्यशैली और गिरफ्तारियों का पैटर्न बिल्कुल अलग रहा है। जेएसएससी सीजीएल मामले में जहां सिर्फ एजेंट और फर्जी तरीके से पास हुए अभ्यर्थी गिरफ्तार हुए हैं, वहीं जेएसएससी के अधिकारी अब भी जांच के दायरे से बाहर हैं। इसके विपरीत, जेपीएससी मामले में आईएएस अधिकारियों और बड़े सरकारी पदों पर बैठे लोगों तक पर कड़ी कार्रवाई की जा चुकी है।