झारखंड के जमशेदपुर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। साकची थाना क्षेत्र के सुवर्णरेखा नदी स्थित गांधी घाट पर रील बनाने के चक्कर में एक बड़ा हादसा हो गया। शनिवार की शाम मोबाइल पर वीडियो बनाने की होड़ में 13 वर्षीय पूनम कुमारी उर्फ पूजा नदी के तेज बहाव में बह गई थी। रविवार की सुबह करीब 9:30 बजे स्थानीय गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद बच्ची का शव नदी से बाहर निकाल लिया है।एसडीओ अर्णव मिश्रा के निर्देश पर रविवार सुबह स्थानीय गोताखोरों की एक टीम को मौके पर भेजा गया था। साकची, मानगो और सीतारामडेरा थाना प्रभारी की मौजूदगी में गोताखोरों ने नदी में तलाशी अभियान शुरू किया। करीब 45 मिनट के अथक प्रयास के बाद गोताखोरों ने पूनम के शव को ढूंढ निकाला।
वहीं, इस हादसे में उसकी बहन आयुषी उर्फ ज्योति भी नदी के तेज बहाव में बह गई थी, जिसे समय रहते बचा लिया गया था। आयुषी का इलाज फिलहाल एमजीएम अस्पताल में जारी है, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है।बेटी पूजा का शव मिलते ही मां राखी देवी और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने औपचारिकता पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज भेज दिया है, हालांकि शुरुआती दौर में परिवार के लोग पोस्टमार्टम करवाने के खिलाफ नजर आए।घटना की जानकारी देते हुए गोताखोरों ने बताया कि बच्ची का शव घटनास्थल से करीब 200 मीटर दूर, निर्माणाधीन ब्रिज के पास पानी के नीचे एक बड़ी चट्टान के बीच फंसा हुआ था। बच्ची का हाथ हल्का सा दिखाई देने पर गोताखोरों ने तुरंत पानी के भीतर जाकर सूझ-बूझ के साथ शव को सुरक्षित बाहर निकाला।
घटना की सूचना मिलते ही पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता नदी घाट पहुंचे और इस बहादुरी भरे कार्य के लिए स्थानीय गोताखोरों को अपनी ओर से आर्थिक सहायता प्रदान की। उन्होंने इस दुखद घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी परिवार के लिए अपने बच्चे को खोना सबसे बड़ा दर्द है।
उधर, जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने भी इस दूसरी बच्ची के शव मिलने पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने प्रशासन की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि एमजीएम अस्पताल में इलाजरत दूसरी बच्ची का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि ऐसी आपातकालीन घटनाओं से निपटने के लिए एक 'तत्काल सहायता टीम' का गठन होना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों के वक्त बिना किसी देरी के राहत कार्य शुरू किया जा सके।
