रांची:-जातिगत जनगणना झारखंड में एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है। हाल में ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी जातिगत जनगणना पर खुलकर अपनी बातें रखी थी। उन्होंने कहा कि इसकी पहल हमने पहले ही कर दी है मामला केंद्रित सरकार के पास लंबित है।


वहीं जातिगत जनगणना को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक लोबिन हेम्रोम ने अपने ही सरकार से यह मांग रखी की बिहार के तर्ज पर झारखंड में भी जातिगत जनगणना होनी चाहिए ताकि पिछड़ों को उनका हक और अधिकार मिल सके। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार इसके लिए शुरू से ही पर्याप्त सील रही है। पत्र के माध्यम से केंद्र सरकार को इसके लिए अवगत करा दिया गया है। जैसे ही केंद्र से हरी झंडी मिलती है वैसे ही जातिगत जनगणना कर ली जाएगी। हमारी सरकार ने सरना धर्म कोड को लेकर के भी केंद्र सरकार से मांग रखा हैं लेकिन अभी तक इस पर कोई जवाब नहीं आया है।


वहीं इस मुद्दे पर झारखंड बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने कहा कि एक ही जूते में पांव डालने का प्रयास राज्य सरकार या उनके सहयोगी दल कर रहे हैं। जनसंख्या के आधार पर जो आगे है वह आगे रह जाएगा और जो पिछड़े हैं वह पीछे ही रह जाएंगे और झारखंड की परिस्थितियां इस तरह की नहीं है। यहां कूद में समाज भी आदिवासी समाज के दर्जे की मांग कर रहे हैं और आदिवासी समाज उनकी मांगों का विरोध कर रहे हैं तो ऐसा ना हो की परिस्थितियां एक दूसरे में उलझे ही रह जाए। सरकार इसे सिर्फ राजनीतिक मुद्दा ना बनाएं और केंद्र सरकार पर ना थोपे।


वहीं कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राकेश सिन्हा ने कहा कि राज्य में जल्द ही जातिगत जनगणना शुरू कर दी जाएगी। आगे उन्होंने कहा कि हमारे नेता राहुल गांधी ने भी इसे सराहनीय प्रयास बताया है ताकि पिछड़ों को उनका हक और अधिकार मिल पाए।