एंकर-छपरा शराबकांड पीड़ितों को मुआवजा को लेकर बीजेपी प्रवक्ता डॉक्टर संजय मयूख ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग को एक ज्ञापन सौंपा है. जिसमें उन्होंने लिखा है कि-बिहार के छपरा,सीवान,गोपालगंज और बेगूसराय में हाल में हुए जहरीली शराब कांड से लगभग 75 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई है. जबकि मीडिया के सामने आए आंकड़ों के अनुसार मरने वाले लोगों की संख्या 100 से अधिक है. इसमें सबसे अधिक मृत्यु छपरा जिले के मशरख इलाके में हुई है.

अपने ज्ञापन में उन्होंने आगे लिखा है कि इस जहरीली शराब कांड में कई बच्चे अनाथ और असहाय हो गए हैं. यह अधिकतर दिहाड़ी मजदूरी करने वाले परिवार हैं. ऐसे में इन बच्चों के जीवन पर भी संकट आ गया है. इनके लिए दो वक्त भोजन जुटाना भी एक बड़ी समस्या बन गई है. इस स्थिति में बिहार राज्य की सरकार ने भी ऐसे बच्चों से मुंह मोड़ लिया है और इन्हें मरने के लिए छोड़ दिया है. इन गांवों में स्थिति काफी भयावह होती जा रही है.


बता दें कि छपरा में हुए जहरीली शराब से मौत के मुद्दे को बीजेपी छोड़ने को तैयार नहीं है. अब पार्टी के नेता इसे राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बनाकर लगातार बिहार सरकार पर हमलावर हो रहे हैं. पिछले दिनों संसद में भी छपरा जहरीली शराब कांड का मुद्दा गरमाया हुआ था. पूरे मामले की जांच करने के लिए दिल्ली से एनएचआरसी की टीम बिहार आई हुई थी. टीम ने घटनास्थल का जायजा लिया था. साथ ही पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर रिपोर्ट केन्द्र सरकार को सौंपेगी.

छपरा शराबकांड पर एनआरआरसी द्वारा स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच टीम के बिहार आने पर जदयू ने कड़ा एतराज जताया था. पार्टी अध्यक्ष ललन सिंह ने संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए केन्द्र की मोदी सरकार पर बिहार को बदनाम करने की एक चाल करार दिया था. उन्होंने संसद में कहा था कि बिहार में एनएचआरसी की टीम जांच करने जाती है तो कर्नाटक में क्यों नहीं जांच करने जाती है.

बीजेपी पहुंच गई बाल संरक्षण आयोग, संजय मयूख ने की राज्य सरकार से मुआवजे की मांग

इधर बिहार के बीजेपी नेता लगतारा इस मामले को लेकर नीतीश सरकार को घेरने में जुटे हुए हैं. नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा, सम्राट चौधरी, सुशील कुमार मोदी समेत कई नेता पीड़ित परिजन को मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं. इसी कड़ी में अब संजय मयूख ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को इस संदर्भ में एक ज्ञापन सौंपा है.