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युवावस्था में की गई नादानी के लिए किसी को पूरी जिंदगी अपराधी मानकर नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता-पटना HC

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MADAN KISHORE JHAलेखक

Patna : पटना हाईकोर्ट ने बिहार पुलिस में सिपाही भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि युवावस्था में की गई नादानी के लिए किसी को पूरी जिंदगी अपराधी का ठप्पा लगाकर नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता. आधुनिक सोच सुधार की होनी चाहिए,दंड की नहीं.

याचिकाकर्ता राहुल कुमार, (पिता शेषनाथ प्रसाद,ग्राम छितौली,थाना मांझागढ़,जिला गोपालगंज के निवासी हैं),ने केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) के विज्ञापन संख्या 1/2023 पर उन्होंने आवेदन किया. 08.2024 को लिखित परीक्षा और 16.01.2025 को शारीरिक परीक्षा पास की.

01.06.2025 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-6,मुजफ्फरपुर में सिपाही के पद पर योगदान दिया. वेरिफिकेशन फॉर्म में आपराधिक मामले के सवाल पर उन्होंने'नहीं'लिखा था. जांच में पता चला कि उनके खिलाफ मांझागढ़ थाना कांड संख्या 24/2016 (धारा 147/148/149/351/323/504/329/294/153(A)/295(A)/296/427/506IPC)दर्ज था,जिसमें 75 नामजद और 10 अज्ञात समेत 150 से ज्यादा लोग आरोपी थे.

इस आधार पर कमांडेंट, BSAP-6,मुजफ्फरपुर ने मेमो संख्या 2683 दिनांक 01.08.2025 से उनकी नियुक्ति रद्द कर दी. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अखिलेश दत्ता वर्मा ने बहस की,जबकि राज्य की ओर से ब्रजभूषण मिश्रा और सीएसबीसी की ओर से अधिवक्ता संजय पांडे,बिनोद कुमार मिश्रा और विवेक आनंद अमृतेश उपस्थित थे.

जस्टिस पार्थ सारथी की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए पाया कि 2016 में जब एफआईआर हुई,तब याचिकाकर्ता किशोर था. ये मामला किशोर न्याय बोर्ड,गोपालगंज भेजा गया.

बोर्ड ने 17.10.2025 के आदेश में याचिका को समाप्त करते हुए सजा के तौर पर सिर्फ अपग्रेडेड मिडिल स्कूल,छितौली परिसर में 40 पेड़ लगाने और एक महीने तक देखभाल करने का निर्देश दिया था. पेड़ वन विभाग को देने थे.

बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि परिवार शिक्षित और अनुशासित है,समाज में कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं है और वह अपराधी प्रवृत्ति का नहीं है.

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दो बड़े फैसलों का हवाला दिया.

कोर्ट ने अवतार सिंह बनाम भारत संघ (2016) 8SCC471 - हर छोटी-मोटी बात छिपाना मटेरियल जानकारी छिपाना नहीं है. नियोक्ता को मनमाने ढंग से नहीं,बल्कि वस्तुनिष्ठ तरीके से फैसला करना होगा. रविंद्र कुमार बनाम उत्तर प्रदेश (2024) 5SCC264 और कमिश्नर ऑफ पुलिस बनाम संदीप कुमार - कोर्ट ने विक्टर ह्यूगो के उपन्यास'ला मिजरेबल'के जीन वलजीन का उदाहरण दिया,जिसे भूखे परिवार के लिए रोटी चुराने पर चोर कहा गया था.

लॉर्ड डेनिंग के फैसले का जिक्र करते हुए कहा - युवावस्था में अक्सर नादानियां हो जाती हैं,जिन्हें माफ कर देना चाहिए.

कोर्ट ने कहा, "डर से कि फॉर्म में मामला लिखने पर नौकरी नहीं मिलेगी,याचिकाकर्ता ने जानकारी नहीं दी होगी. आरोप गंभीर प्रकृति जैसे हत्या,डकैती या बलात्कार जैसे नहीं थे."

हाईकोर्ट ने 1 अगस्त 2025 का बर्खास्तगी आदेश रद्द कर दिया और रिट याचिका स्वीकार कर ली. कोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया कि इस फैसले में की गई टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए 4 महीने के भीतर नया आदेश पारित करें.

यह निर्णय बिहार पुलिस भर्ती में वेरिफिकेशन के नाम पर छोटी-छोटी पुरानी एफआईआर के कारण हजारों युवाओं की नौकरी जाने के मामलों में उदाहरण बन सकता है.

पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-

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