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वैशाली में गंगा कटाव से उजड़ रहे आशियाने, ठेकेदार पर कटावरोधी सामान बेचने का गंभीर आरोप

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Deepak Kumarलेखक

महनार में गंगा की तेज धारा से घर, डेरे और उपजाऊ जमीन नदी में समाए; ग्रामीणों का आरोप- रात के अंधेरे में पिलर, बांस और पौधों को हटाकर बेचा जा रहा सामान, जांच की मांग
वैशाली: बिहार के वैशाली जिले के महनार में गंगा का कटाव अब लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। खड़गपुर बिल्ट चौक से महनार घाट तक गंगा की तेज धारा लगातार जमीन को अपने आगोश में ले रही है। कटाव के कारण नदी किनारे बसे कई परिवारों के घर, डेरे और मवेशियों के रहने के ठिकाने तक नदी में समा चुके हैं। लोगों के सामने अब अपने परिवार और मवेशियों को सुरक्षित रखने का संकट खड़ा हो गया है। वहीं, इस तबाही के बीच कटावरोधी कार्यों को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने ठेकेदार पर कटाव रोकने के लिए लगाए गए पिलर, बांस और अन्य सामग्री को रात के अंधेरे में हटाकर बेचने का आरोप लगाया है।

गंगा की तेज धारा में समा रहे घर और उपजाऊ जमीन
महनार क्षेत्र में गंगा का कटाव लगातार जारी है। नदी की तेज धारा के कारण देखते ही देखते उपजाऊ जमीन पानी में समाती जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले साल से ही इस इलाके में कटाव की समस्या बनी हुई है। नदी के दूसरी तरफ कटाव पर नियंत्रण हुआ, लेकिन उनके इलाके में स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। कटाव की चपेट में आने से कई परिवारों के घर और डेरे गंगा में समा चुके हैं। जिन लोगों ने वर्षों की मेहनत से अपना आशियाना बनाया था, आज वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। सबसे बड़ी परेशानी मवेशियों को सुरक्षित रखने की है, क्योंकि उनके रहने के लिए बने ठिकाने भी नदी में समा चुके हैं।

ठेकेदार पर रात के अंधेरे में सामान बेचने का आरोप
गंगा कटाव की समस्या के बीच अब कटावरोधी कार्यों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कटाव रोकने के लिए लगाए गए पिलर, भूसा, बांस के खंभे और प्लांटिंग में इस्तेमाल की गई सामग्री को रात के अंधेरे में काटकर हटाया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि कटाव रोकने के लिए लगाए गए पेड़-पौधों को भी क्रेन की मदद से उखाड़कर बेच दिया गया। इतना ही नहीं, आरोप है कि उनकी बची हुई टाटी-पलानी तक को उजाड़ दिया गया है। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले में ठेकेदार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, ठेकेदार पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में ठेकेदार का पक्ष भी सामने नहीं आया है।


कटाव से सैकड़ों परिवारों की जिंदगी पर संकट
गंगा का कटाव केवल जमीन का नुकसान नहीं कर रहा, बल्कि नदी किनारे रहने वाले परिवारों की पूरी जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। लोगों की वर्षों की कमाई से बने घर, खेती योग्य जमीन और पशुओं के आश्रय लगातार नदी में समाते जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों को डर है कि कटाव की चपेट में उनके बचे हुए घर और जमीन भी आ सकते हैं।

ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच और स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि कटावरोधी कार्यों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही रात के समय कथित तौर पर हटाई जा रही निर्माण सामग्री और पौधों के मामले की भी जांच हो। लोगों की मांग है कि गंगा कटाव से प्रभावित परिवारों को राहत और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए तथा नदी के कटाव को रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की शिकायतों पर कब तक कार्रवाई करता है और गंगा कटाव से उजड़ रहे परिवारों को राहत दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

वैशाली से रिशभ कुमार की रिपोर्ट

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