JHARKHAND CRIME
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को अपराध की दुनिया में धकेल रहा राहुल दुबे गैंग, 30 से 50 हजार रुपये का देता है लालच
रांची: राजधानी रांची में राहुल दुबे गैंग का नेटवर्क पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। गैंग के सदस्यों की गिरफ्तारी और पुलिस मुठभेड़ में अपराधियों के घायल होने के बाद पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं। पुलिस जांच में आरोप सामने आए हैं कि यह गैंग सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को अपने आपराधिक नेटवर्क में शामिल कर रहा है। नए लड़कों को30 हजार से50 हजार रुपये तक का लालच देकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के लिए तैयार किया जाता है।
फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से युवाओं को बनाता है निशाना
रांची पुलिस की जांच में सामने आया है कि राहुल दुबे गैंग नए युवाओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहा है। बताया जा रहा है कि गैंग के सदस्य फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए अपनी पहचान छिपाकर युवाओं से संपर्क करते हैं। उन्हें कम समय में मोटी रकम कमाने का लालच दिया जाता है।
आरोप है कि एक आपराधिक घटना को अंजाम देने के बदले युवाओं को30 हजार से50 हजार रुपये तक देने का प्रलोभन दिया जाता है। इस तरह कम उम्र के लड़कों को धीरे-धीरे संगठित अपराध के नेटवर्क में शामिल किया जाता है।
हथियारों की डिलीवरी के लिए भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल
जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि गैंग के सदस्य हथियारों की डिलीवरी से जुड़े संपर्क स्थापित करने के लिए भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे थे। फर्जी पहचान के जरिए संपर्क बनाए जाने के कारण पुलिस के सामने इस नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
गैंग के कई सदस्यों की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद पुलिस अब सोशल मीडिया गतिविधियों और ऑनलाइन संपर्कों की भी जांच कर रही है। पुलिस का प्रयास है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर पूरे संगठित अपराध तंत्र को ध्वस्त किया जाए।
युवाओं से पुलिस की खास अपील
रांची पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि वे चंद पैसों के लालच में अपराधियों के संपर्क में न आएं। सोशल मीडिया पर मिलने वाले ऐसे प्रस्तावों से सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल अपराधियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को अपराध की दुनिया में धकेलने वाले पूरे नेटवर्क को तोड़ना है।
पुलिस के लिए क्यों बढ़ रही चुनौती?
राहुल दुबे गैंग से जुड़े इन खुलासों ने संगठित अपराध के बदलते तरीकों को सामने रखा है। अब अपराधी केवल पारंपरिक संपर्कों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर नए लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस की जांच का दायरा भी सोशल मीडिया और डिजिटल गतिविधियों तक बढ़ गया है।
फिलहाल रांची पुलिस गैंग के नेटवर्क, उसके सदस्यों और अन्य संभावित सहयोगियों की पहचान करने में जुटी है। आने वाले दिनों में जांच के दौरान और भी खुलासे होने की संभावना है।
रांची से नैयर की रिपोर्ट
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