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सौरभ ने शुरू किया फास्ट फूड रेस्टोरेंट तो अरमान अली फर्नीचर का कारोबार शुरू कर बने आत्मनिर्भर

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MADAN KISHORE JHAलेखक

पटना:उद्यमिता और स्वरोजगार किसी भी राज्य की प्रगति, आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता के प्रमुख आधार हैं. इसी सोच को साकार करने के लिए बिहार सरकार का उद्योग विभाग लगातार प्रयास कर रहा है. इसके तहत युवाओं को अपना कारोबार शुरू करने के अवसर मिल रहे हैं.

पहले पूंजी की कमी के कारण कई लोग अपना कारोबार शुरू करने का सपना पूरा नहीं कर पाते थे. लेकिन अब मुख्यमंत्री उद्यमी योजना ने इस बाधा को काफी हद तक दूर किया है. इस योजना का लाभ लेकर महिलाएं और युवा न केवल अपना रोजगार शुरू कर रहे हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक करोड़ परिवारों को उद्यमिता और आर्थिक स्वावलंबन से जोड़कर उद्यमी परिवार बनाने का लक्ष्य तय किया है.

आज हम आपको बिहार के ऐसे ही दो उद्यमियों सौरभ कुमार और अरमान अली की कहानी बता रहे हैं. दोनों ने अपना कारोबार शुरू किया और अपने साथ कई अन्य लोगों को भी रोजगार देने का अवसर प्रदान किया.

उद्यमी योजना का लाभ लेकर शुरू किया अपना कारोबार

पश्चिमी चंपारण के रहने वाले सौरभ कुमार का चयन मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत हुआ है. सौरभ बताते हैं कि,"इस योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें अपना रेस्टोरेंट शुरू करने में मदद की. इस योजना के माध्यम से मुझे अपना रेस्टोरेंट शुरू करने के लिए 7 लाख रुपये की अनुदान राशि मिली. इस आर्थिक सहायता से मुझे अपना व्यवसाय शुरू करने और खुद के लिए रोजगार का अवसर बनाने में मदद मिली. साथ ही, मैं दो-तीन अन्य लोगों को भी रोजगार दे पा रहा हूं."

सौरभ के रेस्टोरेंट में चाउमीन, मोमोज और कई तरह के फास्ट फूड आइटम मिलते हैं, जिन्हें स्थानीय लोग काफी पसंद कर रहे हैं. इनकी बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने फास्ट फूड रेस्टोरेंट और कैफे की शुरुआत की है.

"मुझे खुशी है कि सरकारी योजना की मदद से मैं अपना सपना पूरा कर सका और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ पाया. इसके लिए मैं मुख्यमंत्री का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं."

17लोगों को दे रहे रोजगार

मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के लाभार्थी अरमान अली फर्नीचर का कारोबार करते हैं. वह लकड़ी से बेड, कुर्सी, अलमारी सहित कई तरह के फर्नीचर बनवाते हैं. अरमान अली बताते हैं कि, "मैं लकड़ी के फर्नीचर, जैसे बेड, चेयर और अलमारी आदि का निर्माण करवाता हूं. हम सागवान और शीशम की लकड़ी से अच्छी गुणवत्ता वाले फर्नीचर तैयार करते हैं." उनके फर्नीचर की मांग बिहार के साथ-साथ नेपाल में भी है. वह अपने उत्पाद नेपाल भी भेजते हैं. अरमान अली कहते हैं, “आज मेरे साथ17लोग काम कर रहे हैं. इस तरह हमारा व्यवसाय दूसरे लोगों को भी रोजगार दे रहा है. मैंने लगभग10लाख रुपये के निवेश से इस कारोबार की शुरुआत की थी और आज हमारा कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच गया है. बिहार से लेकर नेपाल तक लोग हमारे फर्नीचर को पसंद कर रहे हैं.”

क्या है मुख्यमंत्री उद्यमी योजना?

मुख्यमंत्री उद्यमी योजना बिहार सरकार के उद्योग विभाग की ओर से संचालित एक महत्वपूर्ण योजना है. इसका उद्देश्य राज्य के युवाओं, महिलाओं और विभिन्न वर्गों के लोगों को नया उद्योग या स्टार्टअप शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है.

इस योजना के तहत उद्योग स्थापित करने के लिए कुल10लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है. इसमें5लाख रुपये का अनुदान सरकार की ओर से दिया जाता है, जबकि शेष5लाख रुपये ब्याज-मुक्त ऋण के रूप में उपलब्ध कराए जाते हैं.

मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत एमएसएमई क्षेत्र में45हजार उद्यमी तैयार किए जा रहे हैं. इनमें14हजार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, 10हजार अति पिछड़ा वर्ग, 9,500महिलाएं, 9हजार युवा और2,500अल्पसंख्यक वर्ग के उद्यमी शामिल हैं.

सौरभ और अरमान जैसे उद्यमियों की सफलता बताती है कि सही अवसर, आर्थिक सहायता और मार्गदर्शन मिलने पर बिहार के युवा अपने सपनों को साकार कर सकते हैं. साथ ही, वे दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं.

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