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राजू की छोटी-सी चाय की दुकान से मिठाई के कारोबार तक का सफर, PMFME योजना से चमकी किस्मत
पटना: राजू कुमार की तरह आप भी अपना बिजनेस शुरू करने का सपना देख रहे हैं,खासकर खाने-पीने से जुड़े किसी काम का,तो ऐसे में केंद्र सरकार की'प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना'आपके लिए बहुत मददगार साबित हो सकती है. सारण जिले के राजू कुमार पहले होटल में हेल्पर का काम करते थे. इसके बाद राजू ने कुछ पैसे जमा किए और अपनी मेहनत,लगन और आत्मविश्वास के बल पर एक छोटी-सी चाय की दुकान से अपने स्वरोजगार की शुरुआत की. धीरे-धीरे उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार करने के बारे में सोचा. इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME)के बारे में पता चला. इस योजना के तहत उन्हें छपरा उद्योग विभाग से सहयोग मिला और उन्होंने अपनी छोटी-सी चाय की दुकान को मिठाई की दुकान में तब्दील कर दिया. वह बताते हैं कि उनकी दुकान में बर्फी,क्रीम चॉप,रस मलाई,सूखी मिठाइयां और चाय मिलती हैं. आज मेरे दुकान में पांच स्टाफ भी काम करते हैं. राजू बताते हैं,"आज मैं इस दुकान से अच्छी आमदनी अर्जित कर रहा हूं."राजू कुमार की तरह आप भी सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपने कारोबार को आगे बढ़ा सकते हैं. आइए,जानते हैं प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना के तहत मिलने वाले लाभ और इसकी पात्रता के बारे में.
इस योजना से मिलने वाले फायदे
इस योजना का मुख्य उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को वित्तीय,तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करना है. योजना के तहत अचार,पापड़,बेकरी और मसालों जैसे खाद्य उत्पादों से जुड़े नए या पुराने फूड प्रोसेसिंग बिजनेस को शुरू करने या उसका विस्तार करने के लिए कुल परियोजना लागत का 35 प्रतिशत हिस्सा सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में दिया जाता है.
इस योजना के तहत पात्र उद्यमियों को अधिकतम 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है. यानी,परियोजना लागत के आधार पर उद्यमी को अधिकतम 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता सब्सिडी के रूप में दी जा सकती है. स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को छोटे उपकरण खरीदने और रोजमर्रा के खर्चों के लिए प्रति सदस्य 40,000 रुपये तक की सीड कैपिटल मिलती है.
योजना का लाभ किसे मिल सकता है?
आपको बता दें कि इस योजना का लाभ ऐसे व्यक्तिगत उद्यमी उठा सकते हैं, जो पहले से कोई छोटा फूड प्रोसेसिंग का काम कर रहे हैं और उसे बड़ा रूप देना चाहते हैं. इसके साथ ही, नए कारोबारी भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं, जो सरकार की 'एक जिला, एक उत्पाद' पहल के तहत अपना उद्योग शुरू करना चाहते हैं. किसान उत्पादक संगठन, स्वयं सहायता समूह और सहकारी समितियां भी इस योजना के तहत निर्धारित पात्रता के अनुसार वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती है.
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