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पटना हाईकोर्ट ने मधेपुरा डीएम की ओर से अधिवक्ता को अवमानना केस चलाने का जारी नोटिस किया रद्द
Patna : पटना हाईकोर्ट ने मधेपुरा के डीएम की ओर से एक अधिवक्ता को अवमानना केस चलाने का जारी नोटिस को रद्द कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भूमि अर्जन प्राधिकार के रूप में कार्य कर रहा डीएम को अवमानना कानून के तहत अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का अधिकार नहीं है.
जस्टिस आलोक कुमार की एकलपीठ ने अधिवक्ता सुशांत प्रवीर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया. आवेदक की ओर से अधिवक्ता आयुष अभिषेक ने कोर्ट को बताया कि आवेदक2010से हाईकोर्ट में वकालत कर रहा है और मधेपुरा डीएम के समक्ष भूमि अर्जन वाद संख्या04/2023में पैरवी कर रहा था.
उनका कहना था कि5जुलाई, 2024को व्यक्तिगत कठिनाई बताते हुए मंगलवार के बजाय शुक्रवार को तारीख देने का अनुरोध किया था. इस पर मधेपुरा के डीएम नाराज हो गए और चिल्लाने लगे. उन्होंने बॉडीगार्ड से बाहर फेंकवाने की धमकी दी.
इस घटना की जानकारी11जुलाई,2024को रजिस्टर्ड डाक से हाई कोर्ट के महानिबंधक सहित बिहार बार काउंसिल के अध्यक्ष,मुख्य सचिव एवं एसोसिएशन के अध्यक्ष को शिकायत भेजी. इसके बाद26जुलाई2024को शाम5बज कर7मिनट पर डीएम कोर्ट के कोर्ट मास्टर के मोबाइल नंबर से उनके व्हाट्सएप पर शोकॉज नोटिस भेजा गया.
ये पूछा गया कि क्यों नहीं अवमानना कानून की धारा12के तहत कार्यवाही की जाए. उन्होंने कोर्ट को बताया कि डीएम ने बदले की भावना से यह नोटिस की है. सच में नोटिस देना था,तो घटना के दिन6जुलाई को नोटिस जारी करना चाहिए था. लेकिन नोटिस26जुलाई को भेजा गया.
उनका यह भी कहना था कि अवमानना कानून के तहत डीएम के कोर्ट को कोर्ट नहीं माना जा सकता. वहीं राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मुख्य सचिव ने2अगस्त, 2024को कोसी प्रमंडल आयुक्त से घटना की जांच कराई और16अगस्त2024की रिपोर्ट में डीएम के दुर्व्यवहार का आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया.
हाईकोर्ट ने आयुक्त के जांच रिपोर्ट के बाद विवाद को समाप्त माना,लेकिन अवमानना नोटिस के अधिकार पर कहा कि अवमानना अधिनियम1971के तहत दंड देने का अधिकार केवल सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट को है.
पारंपरिक अधीनस्थ सिविल और क्रिमिनल कोर्ट भी स्वतंत्र रूप से नोटिस नहीं दे सकते,उन्हें हाईकोर्ट से अनुमति लेना होता है. ऐसे में भूमि अर्जन प्राधिकारी तो बिल्कुल भी अवमानना कार्यवाही नहीं चला सकते. कोर्ट ने व्हाट्सएप पर भेजी गई नोटिस को निरस्त कर दिया. साथ ही रिट याचिका को निष्पादित कर दिया.
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
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