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पटना हाईकोर्ट में रामरेखा घाट नहर से अतिक्रमण हटाने मामले पर 2 सप्ताह बाद होगी सुनवाई

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MADAN KISHORE JHAलेखक

Patna : पटना हाईकोर्ट में मोतिहारी शहर के मोतीझील बुढ़ी गंडक नदी से निकले ब्रिटिश कालीन नहर को रामरेखा घाट सिमरा से जोड़ता है,के दोनों ओर हुए अतिक्रमण के मामले पर सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी. भारतीय न्यायप्रिय नागरिक परिषद की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस वी कामेश्वर राव की खंडपीठ ने सुनवाई की.

इस बीच प्रशासन की ओर से समस्या से निपटने के लिए ठोस कार्रवाई की जा रही है. रामरेखा नहर पर कब्जा जमाये 110 लोगों को प्रशासन की ओर से नोटिस भेजा जा चुका है. प्रशासन ने कहा कि यदि स्वेच्छापूर्वक कब्जा नहीं हटाने पर बल प्रयोग के साथ जुर्माना वसूलने की कार्रवाई होगी. 12 किलोमीटर लंबी और 45 फीट चौडी नहर का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर हैं. सिरहाना नदी का जल सीधे मोतीझील में प्रवेश करता था.

पिछली सुनवाई के दौरान मोतीहारी नगर निगम के वार्ड नंबर 18 के सदस्य संजय जायसवाल ने कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका डाल कर बताया था कि ये नहर नहीं, बल्कि एक नाला हैं. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने इस हस्तक्षेप याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जब कि मोतिहारी नगर निगम स्वयं पार्टी हैं,तो वार्ड पार्षद के हस्तक्षेप याचिका दायर करने का कोई अधिकार ही नहीं है.

उन्होंने बताया था कि जिला प्रशासन, मोतिहारी नगर निगम और राज्य सरकार इसे नहर मान रही है. जिला प्रशासन ने बताया था कि नहर के आसपास हुए अतिक्रमण करने वालों को नोटिस दे दिया गया है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि नहर के आसपास बड़े - बड़े पेड़ हो गये हैं.

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हलफनामा दायर कर यह बताने को कहा था कि वार्ड पार्षद को हस्तक्षेप याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने डीएम, पूर्वी चंपारण के 4 जून, 2026 के पत्र के सन्दर्भ में हुई कार्रवाईयों पर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था.

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया था कि मोतिहारी शहर के मोतीझील को बुढ़ी गंडक नदी पर स्थित रामरेखा घाट सिमरा से जोड़ता है. इसकी लम्बाई लगभग ग्यारह किलोमीटर है. मोतीझील को शहर की जीवनरेखा भी कहा जाता है. इससे मोतिहारी शहर को पेयजल मिलता है. साथ ही बाढ़ के समय ये नहर इस शहर को बाढ़ से बचाता है.

अधिवक्ता विकास पंकज ने बताया था कि 24 दिसंबर,2022 को कार्यपालक अभियंता,तिरहुत कैनाल डिवीज़न ,मोतिहारी ने इस सम्बन्ध में पूर्वी चम्पारण के जिलाधिकारी को पत्र लिखा,जिसमें इस नहर को बाढ़ के समय अतिउपयोगी और मोतीझील को रिचार्ज करने का वैकल्पिक श्रोत बताया गया था.

अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने बताया था कि काफी बैठकें हुई,लेकिन अब तक कोई विस्तृत रिपोर्ट नहीं दिया गया था. इससे मोतिहारी शहर के नागरिकों को काफी कष्ट और असुविधा हो रही है. इस मामले पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जायेगी.

पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-

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