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पटना HC ने टेंडर प्रक्रिया में मनमानी पर सरकार को लगाई फटकार, ठेकेदार को 5 लाख रुपये मुआवजा का दिया आदेश

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MADAN KISHORE JHAलेखक

Patna : पटना हाईकोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया में मनमानी पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए ठेकेदार को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ मामूली तकनीकी बहाने लगा कर एल-1ठेकेदार को बाहर करना पूरी तरह मनमाना और गैरकानूनी है. साथ ही एकलपीठ के फैसले पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है. वहीं पांच लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश को सही ठहराया. कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर अपील को खारिज कर दिया.

जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा और जस्टिस विकास कुमार की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई की. ये मामला ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा टेंडर जारी करने से सम्बन्धित था.30जनवरी, 2017को टेंडर कमेटी ने आवेदक सहित5बोलीदाताओं को तकनीकी रूप से योग्य पाया.3फरवरी, 2017को वित्तीय बिड खुलने पर आवेदक को एल-1घोषित किया गया.

लेकिन विधायक के शिकायत पर जांच हुई. टेंडर कमेटी ने एल-1और एल-2को स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट (एसबीडी) की धारा4.5बी (बी) का पालन नहीं करने का आरोप लगा दोनों को अयोग्य घोषित कर टेंडर रद्द कर दिया और नया टेंडर जारी कर दिया. दूसरे टेंडर में मेसर्स लक्ष्मण कुमार को एल-1घोषित कर काम दे दिया गया जिसे कोर्ट में चुनौती दी गई.

एकलपीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि ठेकेदार को बाहर करने का आधार टिकने लायक नहीं है. तब तक काम80%पूरा हो चुका था. एकलपीठ ने काम वापस दिलाने के बजाय ठेकेदार को5लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का आदेश राज्य सरकार को दिया. राज्य सरकार ने एकलपीठ के आदेश को अपील दायर कर चुनौती दी.

राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि एल-1 घोषित होने से कोई कंकलुडेड कॉन्ट्रैक्ट नहीं बनता, ठेकेदार ने नया टेंडर में हिस्सा भी नहीं लिया, और नुकसान का कोई दावा नहीं किया. एकलपीठ के5 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश को गलत बताया. कोर्ट ने सरकार के दलील को खारिज करते हुए कहा कि जब स्टांप पेपर शपथकर्ता के नाम से होने का कोई शर्त नहीं रखी गई थी,तो फिर उस आधार पर किसी को अयोग्य ठहराना मनमानी है.

पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-

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