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पटना HC ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी बमबम मुखिया की उम्रकैद की सजा रखा बरकरार, आपराधिक अपील किया खारिज
Patna : पटना हाईकोर्ट ने10से12वर्ष की नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के दोषी बमबम मुखिया उर्फ गोविंद मुखिया की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए दायर आपराधिक अपील को खारिज कर दिया. जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने अपील पर सुनवाई के बाद रदद करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया.
ये मामला1-2मई,2017की रात का है. पीड़िता की मां झंझारपुर गई थी, घर में वह और उस का5साल का भाई था. रात करीब3बजे पड़ोसी बमबम मुखिया ने घर में घुसकर मुंह दबाकर दुष्कर्म किया, जिससे बच्ची को गंभीर रक्तस्राव हुआ.
चीख सुनकर चाची रामदई देवी पहुंची, तो आरोपी भाग गया. बच्ची को दरभंगा के डीएमसीएच में भर्ती कराया गया और2मई को महिला थाना में केस दर्ज हुआ. दरभंगा के पॉक्सो कोर्ट ने28सितंबर,2018को धारा376(2)(i) आईपीसी और धारा6पॉक्सो में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और30हजार जुर्माना का सजा दी.
सजा आदेश को हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर कर चुनौती दी गई. हाईकोर्ट ने केस पर सुनवाई के दौरान कहा कि पीड़िता के तीन बयान - फर्दबयान, धारा164सीआरपीसी के तहत बयान और कोर्ट में गवाही में मूल बात एक जैसी है.
मेडिकल जांच में हाइमन फटा हुआ, कई खरोंच और सक्रिय रक्तस्राव पाया गया, जो यौन हमले की पुष्टि करता है. रेडियोलॉजिकल जांच में बच्ची का उम्र10से12साल के बीच आंकी गई. जिससे12साल से कम उम्र के बच्ची के साथ दुष्कर्म का अपराध सिद्ध होता है.
बेहोश होने या अस्पताल कौन ले गया, जैसे विरोधाभास बातें मामूली हैं. कोर्ट ने पुलिस जांच पर गम्भीर सवाल उठाते हुए कहा कि महिला थाना की तत्कालीन थानाध्यक्ष ने जांच में कई बुनियादी और जरूरी कदम नहीं उठाई.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि स्वतंत्र गवाहों से पूछताछ नहीं की गई, आरोपी की मेडिकल जांच नहीं कराई गई, पीड़िता के खून से सने कपड़ों और घटनास्थल से मिले अहम फोरेंसिक साक्ष्यों को जांच के लिए नहीं भेजा गया और न ही घटनास्थल का नक्शा तैयार किया गया.
इतने गंभीर अपराध, जिसमें नाबालिग बच्ची यौन शोषण की शिकार हुई, में इस तरह की लापरवाही जांच के प्रति असंवेदनशील रवैये को दर्शाती है. आईओ की ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती. कोर्ट ने दरभंगा के एसएसपी को पूरे मामले की जांच कर संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई करने का आदेश दिया.
साथ ही एसएसपी को कार्रवाई से पहले अधिकारी को सुनवाई का उचित मौका देने का निर्देश दिया. कोर्ट ने तीन माह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया.
वहीं कोर्ट ने आपराधिक अपील को रद्द करते हुए पीड़िता को30दिन के भीतर बिहार पीड़ित मुआवजा योजना के तहत6लाख रुपया बतौर मुआवजा देने का आदेश दिया.
कोर्ट ने दरभंगा के जिला विधिक सेवा प्राधिकार को मुआवजा राशि पीड़ित को दिलाने का दायित्व सौंपा और कहा कि आदेश पालन होने की रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया.
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
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