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पटना HC ने गुवाहाटी से पटना तक गांजा लेकर घूमने वाली गाड़ी मामले में बिहार की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाया सवाल

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MADAN KISHORE JHAलेखक

Patna : पटना हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए राज्य के सुरक्षा व्यवस्था का दावा‘खोखला’बताया.गुवाहाटी से पटना तक 64 किलो गांजा लेकर बेधड़क घूमती रही गाड़ी,पुलिस जांच पर पटना हाईकोर्ट ने गंभीर प्रश्न उठाया.

असम के गुवाहाटी से बिहार के दीदारगंज (पटना) तक की सैकड़ों किलोमीटर लंबी दूरी,रास्ते में दर्जनभर पुलिस थाने,सीमा जांच चौकियां और हाई-टेक चेकिंग पॉइंट,लेकिन 63.76 किलोग्राम गांजे से लदी महिंद्राTUVगाड़ी बिना किसी रुकावट के सरपट दौड़ती रही.न ड्राइविंग लाइसेंस,न गाड़ी के रजिस्ट्रेशन कागज और न ही कोई पहचान पत्र,फिर भी सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचकर यह गाड़ी पटना की चौखट तक पहुंच गई.

सुरक्षा में इस भारी चूक को लेकर पटना हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के दावों की कड़ी आलोचना की है.जस्टिस अरुण कुमार झा की एकल पीठ ने दो नाबालिगों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि "आम जनता की सुरक्षा के लिए'पुख्ता सुरक्षा इंतजाम'का राज्य सरकार का दावा एक तरह का ढोंग नजर आता है."

हाईकोर्ट ने तीन बड़े और कड़े सवाल उठाए. कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि दो नाबालिग बिना किसी वैध दस्तावेज या ड्राइविंग लाइसेंस के अंतरराज्यीय सीमाओं को पार कर पटना तक गांजा ला सकते हैं,तो कल को वे कोई विस्फोटक भी ला सकते थे,जिससे आम जनता की जान को खतरा हो सकता था.

डीआरआई (DRI)ने गिरफ्तारी के समय आरोपियों की उम्र 25 वर्ष और 21 वर्ष दर्ज की थी.हालांकि,बाद में जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड की जांच में दोनों आरोपी नाबालिग (15 वर्ष 9 महीने और 16 वर्ष) पाए गए.

हाईकोर्ट ने इस विरोधाभास पर भी आश्चर्य जताया.साथ हीयाचिकाकर्ताओं का यह दावा कि वे कभी किसी स्कूल नहीं गए,कोर्ट को गले नहीं उतरा. कोर्ट को अंदेशा है कि कहीं उम्र छिपाने या सरकारी योजनाओं/पहचान पत्रों का गलत इस्तेमाल करने के लिए फर्जीवाड़ा तो नहीं किया गया.

SSPपटना को 3 महीने के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

पटना हाईकोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP),पटना को पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच करने के आदेश दिए हैं.

हाईकोर्ट के मुख्य निर्देश देते हुए कहा कि रास्ते भर सुरक्षा चेकिंग में हुई लापरवाही की पूरी जांच की जाए.

साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि क्या याचिकाकर्ता सचमुच नाबालिग हैं और क्या उन्होंने कभी किसी स्कूल में पढ़ाई नहीं की.यदि जांच में उम्र छुपाने या किसी फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है,तो डीआरआई और राज्य सरकार उनकी जमानत रद्द कराने के लिए स्वतंत्र होंगे.

बाल न्याय अधिनियम के तहत दोनों नाबालिगों को जमानत दी गयी.कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए कोर्ट ने कहा कि बाल न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम,2015 के तहत कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों (CICL)के लिए जमानत एक अधिकार की तरह है.केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर उन्हें जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता.

कोर्ट ने कहा कि बच्चों को जेल/सुधार गृह भेजने का कदम अंतिम विकल्प होना चाहिए.इसके तहत हाईकोर्ट ने निचली अदालत और जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड के आदेशों को निरस्त करते हुए दोनों नाबालिगों को ₹10,000 के मुचलके और परिजनों की गवाही की शर्त पर जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया.

पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट

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