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पटना HC का बड़ा फैसला: भारत-नेपाल सीमा सड़क के लिए अधिग्रहित जमीन के अतिरिक्त मुआवजे की होगी वसूली
पटना/अररिया: भारत-नेपाल सीमा सड़क निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े मामले में पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जमीन की प्रकृति और मूल्यांकन को लेकर गड़बड़ी पाई जाती है, तो अंतिम मुआवजा अवार्ड तैयार होने से पहले अधिकारी जमीन की दोबारा जांच कर सकते हैं। जरूरत से अधिक भुगतान की वसूली भी कानून के अनुसार अंतिम अवार्ड तैयार होने के बाद की जा सकती है। इस मामले में अदालत ने जमीन मालिक की अपील खारिज करदी।
64गांवों की456एकड़ से अधिक जमीन का हुआ था अधिग्रहण
मामला बिहार के अररिया जिले का है, जहां भारत-नेपाल सीमा सड़क निर्माण के लिए नरपतगंज, फारबिसगंज, कुरसाकांटा और सिकटी अंचलों के64 गांवों की कुल456.01 एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहित की गई थी।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया वर्ष2016 में शुरू हुई थी। आपातकालीन प्रावधानों के तहत जमीन मालिकों को अनुमानित मुआवजे का भुगतान किया गया था। बाद में शिकायतें मिलने पर जमीन की प्रकृति और मुआवजे की दर की जांच कराई गई। जांच समिति ने कुछ जमीनों को आवासीय के बजाय कृषि योग्य बताया, जिसके बाद अतिरिक्त मुआवजे की वसूली का मामला सामने आया।
छह सदस्यीय समिति की जांच के बाद उठा मामला
जांच के बाद जिला भूमि अर्जन पदाधिकारी ने जमीन मालिकों को नोटिस जारी कर कथित अतिरिक्त मुआवजे की राशि लौटाने को कहा। प्रभावित जमीन मालिकों ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए दलील दी कि अधिग्रहण के समय जमीन को आवासीय माना गया था और मुआवजा भी उसी आधार पर दिया गया था। उनका यह भी कहना था कि सड़क निर्माण पूरा होने के बाद मुआवजे की प्रक्रिया दोबारा खोलना उचित नहीं है।
हालांकि, अदालत ने माना कि शुरुआती भुगतान अनुमान के आधार पर किया गया था और जब तक भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की धारा37 के तहत अंतिम अवार्ड तैयार और स्वीकृत नहीं होता, तब तक मुआवजे की प्रक्रिया को पूरी तरह अंतिम नहीं माना जा सकता।
बैंक खाते फ्रीज करने पर अदालत ने जताई आपत्ति
हाईकोर्ट ने अतिरिक्त मुआवजे की वसूली के अधिकार और बैंक खाते फ्रीज करने की कार्रवाई के बीच अंतर स्पष्ट किया। अदालत के अनुसार, अधिकारियों को कानून के अनुसार अतिरिक्त राशि की वसूली का अधिकार है, लेकिन केवल इस उद्देश्य से जमीन मालिकों के बैंक खाते फ्रीज करना उचित नहीं है।
अदालत ने कहा कि अंतिम अवार्ड तैयार होने के बाद अतिरिक्त भुगतान की वसूली पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट, 1914 या किसी अन्य लागू कानून के तहत की जा सकती है। साथ ही, पहले के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि संबंधित जमीन मालिकों से अतिरिक्त राशि पर ब्याज नहीं लिया जाएगा, क्योंकि उन्हें भुगतान में हुई गलती के लिए दोषी नहीं माना गया।
जमीन मालिकों के पास अपील का विकल्प बरकरार
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन जमीन मालिकों को जमीन की प्रकृति या मुआवजे की राशि को लेकर आपत्ति है, वे अंतिम अवार्ड जारी होने के बाद भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण (LARRA) के समक्ष कानून के अनुसार अपनी शिकायत रख सकते हैं।
इसके लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की धारा64 में निर्धारित प्रक्रिया और समय-सीमा का पालन करना होगा। अदालत ने माना कि अंतिम अवार्ड के बाद प्रभावित पक्ष को वैधानिक उपाय अपनाने का अधिकार बना रहेगा।
जमीन अधिग्रहण मामलों में अहम फैसला
पटना हाईकोर्ट की खंडपीठ ने1 अक्टूबर2026 को मुन्ना कुमार साह की अपील खारिज करते हुए एकल पीठ के पूर्व आदेश को बरकरार रखा। अदालत के इस फैसले से स्पष्ट हुआ कि शुरुआती अनुमान के आधार पर दिए गए मुआवजे को अंतिम भुगतान नहीं माना जा सकता और जमीन के सही मूल्यांकन के आधार पर अंतिम अवार्ड तैयार किया जाना जरूरी है।
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट
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