Live

नये साल में नीतीश फिर करेगें बिहार की यात्रा

सरकार के साथ - साथ जद यू की भी जानेगें जमीनी हकीकत

A
Arun Chourasiaलेखक

बिहार की जनता से करेगें सीधा संवाद , 2014 के चुनावी महाभारत की बिछायेगें बिसात

Patna:- अपनी यात्राओं के लिये जाने जानेवाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर नये साल में यात्रा पर निकलने वाले है. इसकी जानकारी अब मुख्यमंत्री ने खुद ही दे दी है. नीतीश ने कहा है कि नये साल में 5 जनवरी से उनकी यात्रा प्रस्तावित है. हालांकि उन्होनें कहा है कि यात्रा कहां से शुरू होगी और किन - किन जिलों से गुजरेगी इसकी जानकारी कार्यक्रम तय होने के बाद दी जायेगी . लेकिन नीतीश कोई भी यात्रा की शुरूआत गांधी की कर्मभूमि चंपारण से करते रहे हैं इस लिये इस बार भी पश्चिम चंपारण यानि बेतिया से शुरूआत होगी.

बिहार की जनता से सीधा संवाद करना और इसके लिये पूरे बिहार की यात्रा करना नीतीश का पुराना स्टाइल रहा है . यही वजह है कि नीतीश अभी तक एक दर्जन से ज्यादा यात्रा कर चुके हैं और यह उनकी 15 वीं यात्रा है.2005 के पहले विधान सभा चुनाव में बहुमत नही मिलने के बाद नीतीश ने अपनी यात्रा की शुरूआत 12 जुलाई 2005 से न्याय यात्रा के साथ की थी .

फिर सत्ता मिलने के बाद 9 जनवरी 2009 से धन्यवाद यात्रा फिर 17 जून 2009 से प्रवास यात्रा, 25 दिसंबर 2009 से विश्वास यात्रा 28 अप्रैल 2010 से सेवा यात्रा 9 नवंबर 2011 अधिकार यात्रा 19 सितंबर 2012 संकल्प यात्रा 5 मार्च 2014 संपर्क यात्रा 13 नवंबर 2014 से निश्चय यात्रा 9 नवंबर 2016 विकास कार्यों की समीक्षा यात्रा 12 दिसंबर 2017 विकास कार्यो की समीक्षा यात्रा 3 दिसंबर 2019 जल जीवन हरियाली यात्रा और 22 दिसंबर 2021 से समाज सुधार यात्रा की शुरूआत की थी.

लेकिन इन सभी यात्राओं से नीतीश की यह यात्रा अलग दिख रही है. यानि 2005 से 2019 तक की यात्रा में नीतीश की राजनीतिक हैसियत जहां बिहार में काफी मजबूत थी तो दिल्ली की गद्दी से उनको कोई खास लेना देना नही था. यही वजह रही कि 2009 के लोकसभा चुनाव हो या फिर 2014 का लोकसभा चुनाव . नीतीश ने बिहार की यात्रा तो की लेकिन इसमें उनके सामने लोकसभा चुनाव का संकट नही था. यानि मजबूत गठबंधन के कारण नीतीश बेफिक्र थे.

लेकिन 2005 के बाद नीतीश की यह पहली यात्रा है जिसमें बिहार का राजनीतिक मौसम बिल्कुल बदला - बदला सा है. यानि जहां बिहार में सबसे पुराना और मजबूत गठबंधन एन डी ए से नीतीश अलग हो चुके है और बिहार और दिल्ली दोनों जगह उनका पहला दुश्मन बीजेपी है. यानि दोस्त - दोस्त ना रहा. दूसरी ओर बिधानसभा में जद यू की हैसियत घटने के बाबजूद नीतीश दिल्ली में नरेन्द्र मोदी को सत्ता से बेदखल करने पर तुले हैं.. ऐसे में नीतीश सबसे पहले अपनी पार्टी जद यू के जनाधार की जमीनी हकीकत भी जानना चाहते है तो बिहार की जनता से सीधा संवाद भी करना चाहते हैं. यानि नीतीश यह आश्वस्त होना चाहते है कि उनका घर पूरी तरफ से सुरक्षित है.

शायद यही वजह है कि नीतीश वैसे मौसम में पटना से बाहर निकल रहे जहां कड़ाके की ठंढ है. लेकिन इसी मौसम में नीतीश आम जनता से सीधा संवाद कर अपनी सरकार के कार्यकलाप को नजदीक से देखना चाहते है साथ ही कार्यकर्तओं से भी मिलकर फीड बैक लेना चाहते हैं.हालांकि नीतीश की इस यात्रा पर उनके राजनीतिक विरोधी खासकर बीजेपी नेताओं ने भी जमकर निशाना साधा. ही है उनकी सहयोगी पार्टी राजद का बयान भी असहज करने वाला है.

एक तरफ जहां विधान सभा में विरोधी दल के नेता विजय कुमार सिंहा ने इस यात्रा को पिकनिक यात्रा करार दिया है राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री की पहले की यात्रा सफल होती तो फिर यात्रा निकालने की जरूरत ही नही पड़ती .

लेकिन इन सबसे अलग नीतीश फिर यात्रा पर निकलेगें. इस राज्य सरकार के कामकाज पर कितना असर पड़ेगा और नीतीश का समाज सुधार मुहिम कितना रंग दिखायेगा यह तो बाद की बात है फिलहाल नीतीश अपनी प्रशासनिक और राजनीतिक मजबूती के लिये एक बार फिर पाटलिपुत्र से बिहार के ग्रामीण इलाकों में जाने के लिये तैयार है.यानी यायावर की भूमिका में चरैवेति.चरैवेति..

अशोक मिश्रा , संपादक कशिश न्यूज .

इस ख़बर को शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार तक यह ख़बर पहुँचाएँ।

पूरी वेबसाइट पर पढ़ें और ख़बरें