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मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा दें, बिहार विधानसभा चुनाव रद्द हो – CPI नेता रामनरेश पाण्डेय
पटना: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने कहा कि गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान(एसआईआर) की शुरुआत बिहार से हुई थी. बिहार के65लाख मतदाताओं के नाम काट दिये थे. मतदाता सूची से नाम हटाने के मामले मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और बिहार विधानसभा चुनाव2025को रद्द किया जाय.
भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि चुनाव आयोग के भीतर एक गंभीर संकट का पता चला है. चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने10महीनों में कम से कम14बार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर आपत्ति जताई. इनमें एस आईआर, फ़ॉर्म6में "गैर-कानूनी" और "बिना अधिकार के" किए गए बदलाव और वोटर लिस्ट सॉफ्टवेयर के सेंट्रलाइज़ेशन (कंट्रोल एक जगह करने) जैसे मामले शामिल थे. उन्होंने कंट्रोल एक जगह केंद्रित करने के मुद्दे पर कैबिनेट सेक्रेटरी से भी संपर्क किया था. फिर भी, इन आपत्तियों को नज़रअंदाज़ किया गया और एसआईआर को आगे बढ़ाया गया, जिसके कारण राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में13करोड़ से ज़्यादा वोटरों के नाम हटा दिए गए, ने लगातार चेतावनी दी है कि लोकतंत्र में सरकारों को अपनी पसंद के वोटर चुनने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया का चेहरा बन गए हैं, जिससे इस संवैधानिक संस्था में जनता का भरोसा कम हुआ है. उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है, और भारत निर्वाचन आयोग में भरोसा और विश्वसनीयता बहाल करने के लिए उन्हें इस्तीफ़ा देना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट को चुनाव आयोग के फैसलों और उन्हें लेने के तरीके की जांच करनी चाहिए. यह संकट भाजपा सरकार द्वारा2023 में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन की नियुक्ति प्रक्रिया में किए गए बदलावों से जुड़ा है, जिसने संस्था की आज़ादी को कमज़ोर कर दिया. भारत निर्वाचन आयोग का काम साफ़ है: हर योग्य नागरिक को वोट देने का मौका मिलना चाहिए, और हर हाल में इस ज़िम्मेदारी को पूरा किया जाना चाहिए.
पटना से अंकिता की रिपोर्ट-
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